प्रयागराज, छह मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा में पर्व-त्योहार पर भगदड़ जैसी घटनाओं में जनहानि पर संज्ञान लेते हुए मथुरा जिला प्रशासन से पूछा है कि क्या उनके पास शहर के लिए भीड़ और संकट प्रबंधन की कोई व्यापक योजना मौजूद है।
स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने भीड़ से जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए रणनीतियों और प्रबंधन सिद्धांतों का भी विवरण मांगा है जिसमें प्रशिक्षण और जागरुकता के जरिए संस्थागत क्षमता बढ़ाई जा सके।
स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज ने राज्य सरकार और मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) के खिलाफ दायर याचिका में कहा है कि अधिकारी मनमाने और भेदभावपूर्ण ढंग से चुन-चुनकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हालांकि कथित अनधिकृत निर्माणों के लिए 23 लोगों के खिलाफ विध्वंस आदेश पारित किए गए हैं, लेकिन ऐसी विध्वंस कार्यवाही चुनिंदा रूप से केवल याचिकाकर्ता और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ ही निष्पादित की गई है।
उच्च न्यायालय में मंगलवार को एमवीडीए को एक समग्र हलफनामा दाखिल करने के लिए एक अंतिम अवसर दिया और सभी 23 संपत्तियों से जुड़ी ध्वस्तीकरण की कार्यवाहियों के संबंध में स्थिति और कार्रवाई जैसे मुद्दे पर विवरण मांगा है।
इसके साथ ही अदालत ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अनधिकृत निर्माण के लिए चिह्नित संपत्तियों की संख्या और विवरण के बारे में भी बताने को कहा है। इसके अलावा, अनधिकृत निर्माण रोकने के लिए अपनाई गई नीति, दिशानिर्देश और मानक परिचालन प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी मांगी है।
अदालत ने कहा कि अनधिकृत निर्माण से भगदड़ जैसी स्थितियों में बचाव कार्यों में व्यवधान पैदा होता है। इसलिए मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट यह बताएं कि भीड़ का व्यवहार समझने, स्पष्ट परिभाषित भूमिका और जिम्मेदारी के साथ भागीदारों के बीच समन्वय के लिए क्या कोई विशेषज्ञ निकाय इस जिले में मौजूद है।
अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई 2026 को करेगी।
भाषा सं राजेंद्र वैभव शोभना
शोभना
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