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Saturday, 25 April, 2026
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महाराष्ट्र में गर्मी से मौत : नागरिकों ने पर्याप्त बंदोबस्त न होने के लिए सरकार की आलोचना की

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मुंबई, 17 अप्रैल (भाषा) खारघर में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार समारोह के दौरान 10 से अधिक लोगों की मौत पर मुंबई के विभिन्न वर्गों के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि राज्य सरकार को अप्रैल की भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन शाम को करना चाहिए था या छाया के लिए अस्थायी छत बनानी चाहिए थी।

नवी मुंबई में कई एकड़ में फैले इंटरनेशनल कॉरपोरेट पार्क में रविवार सुबह खुले में पुरस्कार समारोह का आयोजन किए जाने के बाद लू लगने तथा अन्य स्वस्थ्य समस्याओं के कारण 12 लोगों की मौत हो गयी। इस कार्यक्रम में कई लाख लोग शामिल हुए थे जिनमें से ज्यादातर पुरस्कार से सम्मानित अप्पासाहेब धर्माधिकारी के समर्थक थे।

अंधेरी के निवासी गुरचरण मल्होत्रा ने कहा कि मुंबई की गर्मी असहनीय हो गयी है और पांच मिनट भी धूप में बैठना मुश्किल है लेकिन यहां लोगों को घंटों खुले में बैठाया गया और यह बड़ी भूल साबित हुई।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘एक तरफ सरकार कोविड-19 के बढ़ते मामलों से जूझ रही है और लोगों से मास्क पहनने का अनुरोध कर रही है। वहीं, सरकार खुद पर्याप्त बंदोबस्त किए बिना इतने बड़े पैमाने पर एक कार्यक्रम आयोजित करती है।’’

श्रमिक संघ के नेता श्रीरंग बारगे ने कहा कि राज्य सरकार को पता होगा कि धर्माधिकारी के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं और कार्यक्रम में लाखों लोग आ सकते हैं तो पानी, छाया की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी।

एक डॉक्टर ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि यह बहुत असंवेदनशील था कि मंत्री तथा नौकरशाह मंच पर या सामने की कतारों में बैठे थे जो ढकी हुई थी जबकि लाखों लोग प्रचंड गर्मी में परेशान हो रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें कार्यक्रम का आयोजन शाम को करना चाहिए था। हर व्यक्ति की अलग स्थिति हो सकती है लेकिन इतनी गर्मी में एक से दो घंटे तक बैठने वाले ज्यादातर लोगों को लू लग सकती है। लू लगने पर शरीर में पानी के स्तर के साथ ही रक्त में शर्करा और सोडियम इलेक्ट्रोलाइट का स्तर कम हो जाता है।’’

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों तथा अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों में लू जानलेवा साबित हो सकती है।

कई लोगों ने कार्यक्रम में हुई मौतों को लेकर सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।

अकांक्षा महापात्रा ने ट्वीट किया, “देश के गृह मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, एक सामाजिक कार्यकर्ता और उन सभी के कार्यालय मिलकर भी मौसम की स्थिति और गर्मी को अंदाजा नहीं लगा सके, देश भर में लू के संकेत नहीं पहचान सके और लोगों के लिये जरूरी इंतजाम नहीं कर पाए। ऐसे में मैं अपना राज्य और देश चलाने के लिये भरोसा कैसे करूं।”

इंटरनेट पर सक्रिय रहने वाले सैयद रावी अब्बास ने कहा कि ऐसी मौतों के बाद मुआवजा देना कोई न्याय नहीं था और आयोजकों को लापरवाही के लिए जेल भेजे जाने की मांग की।

ट्विटर पर अब्बास के परिचय के मुताबिक वह आपराधिक मामलों के वकील और शोधकर्ता हैं।

एक अन्य ट्विटर उपयोगकर्ता ने कहा, “जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं है, ‘महाराष्ट्र भूषण’ कार्यक्रम के दौरान जो हुआ उसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री कार्यालय महाराष्ट्र, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस की है जिन्होंने खराब योजना बनाई और मौसम की स्थितियों को देखते हुए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए।”

भाषा

प्रशांत माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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