गुरुग्राम: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के प्रशासन से पूछा है कि क्या पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के तरीके और समय को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है.
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने मंगलवार को आठ अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों और मुख्य सचिवों को 2022 के सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.
2022 के इस फैसले के मुताबिक, 7 साल तक की सजा वाले मामलों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा.
हलफनामे के साथ पुलिस की ओर से अभी इस्तेमाल किए जा रहे नोटिस के फॉर्मेट की कॉपी भी देनी होगी. ये दस्तावेज 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से दो दिन पहले दाखिल करने होंगे.
क्या है मामला
यह मामला पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दायर कई अवमानना याचिकाओं से जुड़ा है. इनमें हरियाणा कैडर के 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज नैन और अन्य के खिलाफ संदीप कुमार बनाम पंकज नैन मामले की याचिका भी शामिल है. 2023 से 2026 के बीच दायर इसी तरह की कई याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया गया है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील और एमिकस क्यूरी अंकुर मित्तल ने 2018 के दिल्ली हाई कोर्ट के अमनदीप सिंह जोहर बनाम दिल्ली सरकार के मामले के फैसले की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया. इस फैसले में बताया गया था कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41A के तहत नोटिस किस तरह देना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के 2014 के अर्नेश कुमार बनाम बिहार सरकार के फैसले के बाद CrPC में धारा 41A जोड़ी गई थी. इस फैसले में कहा गया था कि जिन मामलों में सज़ा 7 साल तक है, उनमें गिरफ्तारी अपने आप नहीं होनी चाहिए. पुलिस को पहले आरोपी को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस देना चाहिए.
2018 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में यह भी तय किया गया था कि यह नोटिस किस तरह का होना चाहिए, इसे कैसे दिया जाना चाहिए, आरोपी कितने समय के लिए पेश होने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग कर सकता है और अगर संबंधित पुलिस अधिकारी तय प्रक्रिया का पालन नहीं करता है तो क्या होगा. इसमें कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है.
यह प्रक्रिया लंबे समय तक सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही. जब सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में फैसला दिया, तो उसने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और बाद में दिल्ली पुलिस की ओर से इसे लागू करने के लिए जारी किए गए स्थायी आदेश पर भी ध्यान दिया. कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था से बिना जरूरत की गिरफ्तारियों को रोकने में मदद मिलेगी.
इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को CrPC की धारा 41 और 41A के लिए इसी तरह के अपने स्थायी आदेश लागू करने का निर्देश दिया.
अब कोर्ट क्या जानना चाहता है
चार साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट अब यह जानना चाहता है कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ ने इन निर्देशों का पालन किया है या नहीं.
जस्टिस शर्मा के आदेश में कहा गया है कि तीनों के DGP और मुख्य सचिवों से हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है. इसमें उन्हें साफ तौर पर बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के 2022 के निर्देशों का “पूरी तरह और उसकी भावना के मुताबिक” कैसे पालन किया गया है. इसके साथ पुलिस द्वारा जमीन पर इस्तेमाल किए जा रहे असली नोटिस और उसकी प्राप्ति के फॉर्मेट भी देने होंगे.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई छोटी अर्जियों का भी निपटारा किया. इनमें राज्य की ओर से कुछ अधिकारियों पर पहले के मामलों में देर से निर्देशों का पालन करने के लिए लगाए गए जुर्माने को माफ करने की मांग भी शामिल थी. कोर्ट ने खन्ना में तैनात एक DSP और डेराबस्सी में तैनात एक ASI समेत अधिकारियों की ओर से दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामों को भी रिकॉर्ड में लिया.
मुख्य मामले में दलीलें अभी पूरी नहीं हुई हैं और 16 सितंबर को सुनवाई आगे जारी रहेगी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: भारतीय डिफेंस को चाहिए जमीनी हकीकत की खुराक, और ड्रोन की बड़ी खेप