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Monday, 14 September, 2026
होमदेशहिंदी दिवस पर अमित शाह का युवाओं को संदेश—‘दुनिया की भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी भाषा न छोड़ें’

हिंदी दिवस पर अमित शाह का युवाओं को संदेश—‘दुनिया की भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी भाषा न छोड़ें’

अमित शाह ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था. उन्होंने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति और आत्मसम्मान को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हिंदी दिवस के मौके पर युवाओं से ज्यादा से ज्यादा भाषाएं सीखने की अपील की. साथ ही उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा को नहीं छोड़ना चाहिए. उन्होंने भाषा और संस्कृति के महत्व पर भी जोर दिया.

अमित शाह ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था. उन्होंने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति और आत्मसम्मान को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

एक वीडियो में अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद एक स्थिति ऐसी बनी, जिसमें राजनीतिक आजादी तो मिली, लेकिन अपनी भाषा, संस्कृति और आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दे पीछे चले गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की बात कही थी और भाषा इस मुक्ति का एक अहम हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना और अंग्रेज़ों के समय के कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू करना आत्मसम्मान को फिर से स्थापित करने की दिशा में कदम हैं.

अमित शाह ने कहा कि राजपथ का नाम कर्तव्य पथ करना सिर्फ नाम बदलना नहीं था. इसी तरह ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए दंड देने वाले कानूनों की जगह तीन नए नागरिक केंद्रित कानून लागू किए गए. यह सिर्फ शब्दों में बदलाव नहीं, बल्कि आत्मसम्मान को फिर से स्थापित करने की कोशिश थी.

गृह मंत्री ने देशभर के माता-पिता से भी अपील की कि वे अपने बच्चों से मातृभाषा में बात करें.

उन्होंने युवाओं से कहा, “दुनिया की जितनी भाषाएं सीख सकते हैं, सीखें, लेकिन अपनी भाषा को न छोड़ें.” उन्होंने कहा कि अपनी भाषा बोलने में हीन भावना रखना गलत है. भाषा हमें अपनी मां, अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है.

हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. यह दिन हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अपनाए जाने की याद में मनाया जाता है और देश की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच हिंदी की भूमिका को भी रेखांकित करता है.

एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था.

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