नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ, भारतीय विधिज्ञ परिषद (बार काउंसिल ऑफ इंडिया) और केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें साझा विधि प्रवेश परीक्षा-2024 (क्लैट) न केवल अंग्रेजी में बल्कि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित कराने का अनुरोध किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने याचिका पर शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ, भारतीय विधिज्ञ परिषद और केंद्र को नोटिस जारी किए और उन्हें चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख तय की है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून के छात्र सुधांशु पाठक द्वारा दायर जनहित याचिका में दलील दी गई है कि क्लैट (यूजी) परीक्षा उन छात्रों के साथ भेदभाव करती है और उन्हें समान अवसर प्रदान करने में विफल रहती है जिनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि क्षेत्रीय भाषाओं में निहित है।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता, वकील आकाश वाजपेयी और साक्षी राघव ने कहा, “एक अति-प्रतिस्पर्धी परीक्षा में उम्मीदवार भाषाई रूप से शक्तिहीन होते हैं क्योंकि उन्हें एक नई भाषा सीखने और महारत हासिल करने की अतिरिक्त बाधा को पार करना पड़ता है।”
उन्होंने कहा, “स्वाभाविक रूप से, अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों से संबंधित उम्मीदवारों को हिंदी या अन्य स्थानीय भाषाओं में संचालित विद्यालयों से संबंधित अपने साथियों की तुलना में लाभ होता है। अल्पसुविधा-प्राप्त और वंचित उम्मीदवार कभी भी अपने विशेषाधिकार प्राप्त, अंग्रेजी बोलने वाले प्रतियोगियों के विपरीत पूरी तरह से अंग्रेजी पर आधारित परीक्षा को ‘स्पष्ट’ के रूप में नहीं समझ सकते हैं।”
क्लैट-2024 दिसंबर 2023 में होने वाला है।
भाषा जितेंद्र पवनेश
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