नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने शुक्रवार को उस ‘तानाशाही’ आदेश की निंदा की जिसमें कहा गया है कि सांसद और संसद भवन परिसर में किसी भी प्रकार का विरोध या धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते। माकपा ने केंद्र सरकार से तत्काल यह आदेश वापस लेने को कहा है।
माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “देश और लोगों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मसलों पर अपने विचार रखने लिए सांसद हमेशा विरोध प्रदर्शन का सहारा लेते हैं। भारतीय संसद की शुरुआत से ही यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार रहा है।”
वामदल ने असंसदीय शब्दों की सूची में विस्तार करने पर भी भाजपा नीत केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि इस नये निर्देश में सरकार के विरुद्ध इस्तेमाल किये जाने वाले शब्द “अक्षम” को भी शामिल किया गया है। पार्टी ने कहा, “विरोध प्रदर्शन पर पाबंदी लगाने वाला यह आदेश संसद, उसकी स्वतंत्रता और सांसदों के अधिकारों पर हमला है।”
भाषा यश संतोष
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