चंडीगढ़: 19 साल का एक इंजीनियरिंग छात्र पिछले दो साल से ज्यादा समय से अपने तीन Google अकाउंट्स का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है. अब उसने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उसका कहना है कि उसके डेटा को बचाने की समय-सीमा अब खत्म होने वाली है.
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने 15 अक्टूबर को छात्र की याचिका पर नोटिस जारी किया. यह याचिका केंद्र सरकार और अन्य के खिलाफ दायर की गई थी. तीसरे पक्ष के रूप में Google India Pvt Ltd को भी नोटिस जारी किया गया. बेंच ने आदेश दिया कि नोटिस की तामील दस्ती प्रक्रिया यानी हाथ से भी कराई जाए. कोर्ट ने मामले में नोटिस ऑफ मोशन और अंतरिम निर्देश देने की मांग पर भी नोटिस जारी किया.
केंद्र की ओर से वकील अमृता सिंह के साथ पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता धीरज जैन ने नोटिस स्वीकार किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा.
मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी.
याचिका के मुताबिक, छात्र का फोन 18 अगस्त 2024 को चोरी हो गया था. यही फोन उसके तीनों Google अकाउंट्स से जुड़ा एकमात्र भरोसेमंद डिवाइस था. फोन चोरी होते ही उसने तीनों अकाउंट्स का एक्सेस खो दिया. उसका दावा है कि Google के अकाउंट रिकवरी सिस्टम ने उसके लिए कोई रास्ता नहीं छोड़ा. यह व्यवस्था अकाउंट में दर्ज मोबाइल नंबर की जांच करती है, लेकिन इसके बाद वेरिफिकेशन कोड उसी अकाउंट पर भेज देती है, जिससे छात्र पहले ही बाहर हो चुका है. याचिका में कहा गया है कि किसी व्यक्ति से बात करने या किसी दूसरे तरीके से अपनी पहचान साबित करने का कोई विकल्प नहीं है.
छात्र यहीं नहीं रुका. याचिका के मुताबिक, उसने Google से शिकायत की, उन शिकायतों के बारे में RTI आवेदन दायर किए और साइबर शिकायत भी दर्ज कराई. उसने पहले भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उस याचिका का निपटारा 13 अगस्त को कर दिया गया. कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकरण को IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत उसकी अपील पर 30 दिनों के भीतर फैसला करने को कहा था.
इसके आठ दिन बाद, 21 अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से IT Rules के तहत बनाई गई Grievance Appellate Committee ने अपना आदेश दिया. समिति ने Google को छात्र को उसके जीमेल अकाउंट्स से डेटा वापस पाने के लिए उचित मार्गदर्शन और सहायता देने का निर्देश दिया.
हालांकि, याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि इसके बाद कुछ नहीं हुआ. कंपनी को भेजे गए उसके ईमेल, जिनमें 9 सितंबर को भेजा गया ईमेल भी शामिल है, अभी तक अनुत्तरित हैं.
छात्र ने एक समय-सीमा की ओर भी ध्यान दिलाया है. Google की निष्क्रिय अकाउंट नीति के तहत दो साल तक एक्सेस नहीं होने पर अकाउंट को डिलीट किया जा सकता है. उसके आखिरी लॉगिन से गिनने पर यह अवधि 18 अगस्त 2026 को खत्म हो गई. उसे डर है कि उसका डेटा कभी भी मिटाया जा सकता है.
उसके वकील सत्यम टंडन ने यह मामला काफी हद तक Digital Personal Data Protection Act, 2023 के आधार पर तैयार किया है. याचिका में कानून के तहत Google को “Data Fiduciary” और छात्र को “Data Principal” बताया गया है.
याचिका में कहा गया है कि डेटा का एक्सेस खो देना कानून की धारा 2(u) के तहत “personal data breach” के बराबर है. इसमें DPDP Rules, 2025 के Rule 6(1)(d) के साथ पढ़ी जाने वाली Section 8(5) का हवाला दिया गया है. इन प्रावधानों के तहत बैकअप जैसे कदम उठाना जरूरी है, ताकि एक्सेस खो जाने पर भी डेटा उपलब्ध रहे. याचिका में Section 27 का भी हवाला दिया गया है, जिसके तहत Data Protection Board सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दे सकता है.
याचिका में कहा गया है कि Google के पास डेटा मौजूद है और वह इसे वापस ला सकता है, लेकिन उसने ऐसा नहीं करने का फैसला किया है. याचिका के मुताबिक, यह IT Rules, 2021 के Rules 3(1)(m) और 3(1)(n) के खिलाफ है और संविधान के Article 21 का भी उल्लंघन करता है.
याचिकाकर्ता ने दो साल वाली डेटा डिलीट करने की नीति को भी चुनौती दी है. उसके मुताबिक, DPDP Act की Sections 8(7) और 8(8), DPDP Rules के Rule 8 और Third Schedule के साथ पढ़ने पर, ऐसे डेटा को Data Principal की आखिरी मांग के तीन साल तक सुरक्षित रखना जरूरी है. आदेश में इस चुनौती को याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए आधारों में से एक के रूप में दर्ज किया गया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)