पटना, 17 अप्रैल (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पहले के बयान से पलटते हुये सोमवार को कहा कि प्रदेश में एक अप्रैल 2016 यानि शराबबंदी लागू होने के बाद से जिन लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुयी है, उनके आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार-चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिये जायेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इसके लिये कुछ शर्त भी रखी है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘एक अप्रैल 2016 अर्थात शराबबंदी लागू होने के बाद से राज्य में जिनकी मौत जहरीली शराब पीने से हुयी है, उनके आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार-चार लाख रुपये दिये जायेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब जिस परिवार का कोई सदस्य इससे मरा है, उस परिवार के लोग साफ तौर पर यह बता दें कि ये उनके परिवार के सदस्य हैं, और उन्होंने कहां से शराब खरीदी थी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह सब लिखित रूप में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी को भेजना होगा। अगर पीड़ित परिवार यह सब जानकारी लिखित रूप में जिलाधिकारी के यहां भेजेगा तो हमने यह तय कर दिया है कि परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रुपये की मदद दी जाएगी।’’
उन्होंने ने कहा, ‘‘यह अभी ही नहीं, बल्कि एक अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू हुयी थी, उसके बाद से उन सभी पीडि़तों के निकटतम परिजनों को यह मुआवजा दिया जायेगा जिनकी मौत जहरीली शराब पीने से हुई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने जो आज कहा है, उसे लेकर मुख्य सचिव से लेकर अन्य अधिकारी तक सभी को निर्देश दे देंगे।’’
यह उनके पहले के रुख के उलट है कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को उनकी सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
इससे पहले, दिसंबर 2022 में प्रदेश में जहरीली शराब मामले में 26 लोगों की हुयी मौत के बाद, मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘‘जो पियेगा, वो मरेगा’’, इस बयान के लिये उनकी चौतरफा आलोचना हुयी थी।
जहरीली शराब से हुई मौत से संबंधित पत्रकारों के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे हमें बहुत दुःख हुआ है, भीतर से तकलीफ हो रही है कि कैसे कोई शराब पी लेता है और मर भी जाता है। लोगों को शराब नहीं पीने के लिये प्रेरित करना होगा।
नीतीश ने कहा, ‘‘हमलोग शराबबंदी के पक्ष में हैं। इधर दो-तीन साल से हम देख रहे हैं कि बार-बार समझाने के बावजूद लोग जहरीली शराब पीकर अपनी जान गंवा दे रहे हैं। हर चीज के लिए कानून बना हुआ है, फिर भी लोग ऐसा कर रहे हैं।’’
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के पूर्वी चंपारण जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढकर 26 हो गयी ।
भाषा अनवर रंजन
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