अयोध्या (उप्र), सात नवंबर (भाषा) अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के दौरान रामलीला समेत अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए देश-विदेश के करीब 2,500 कलाकार जुटेंगे।
पांच देशों के कलाकार अपनी-अपनी परंपराओं और शैलियों में रामलीला प्रस्तुत करेंगे, जिससे भगवान श्रीराम की कथा को एक वैश्विक मंच मिलेगा।
दक्षिण अफ्रीका के दो दलों की भागीदारी इस आयोजन का खास आकर्षण होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के एक बयान के मुताबिक श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकार भी अपनी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप रामलीला का मंचन करेंगे। फिलीपीन, थाईलैंड और रूस के कलाकारों के भी भाग लेने की तैयारियां चल रही हैं।
बयान में कहा गया है कि रामनगरी का दसवां दीपोत्सव इस बार अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आएगा। दीपोत्सव में पांच देशों के कलाकार अपनी-अपनी परंपराओं और शैली में रामलीला का मंचन कर भगवान श्रीराम की कथा को वैश्विक मंच प्रदान करेंगे।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या में विभिन्न देशों की कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की झलक एक साथ देखने को मिलेगी।
बयान में कहा गया है, ‘‘देश-विदेश के करीब 2500 कलाकार छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और केरलम की रामचरित्र एवं रामकथा पर आधारित प्रस्तुतियां भी दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता को विस्तार देंगी।’’
दीपोत्सव को केवल दीप प्रज्ज्वलन और धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर इसे वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि देसी-विदेशी कलाकारों की भागीदारी दीपोत्सव को और आकर्षक बनाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘पांच देशों की रामलीला और विभिन्न राज्यों की रामकथा आधारित प्रस्तुतियां आयोजन को सांस्कृतिक विविधता का मंच प्रदान करेंगी। इससे स्थानीय कलाकारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को भी अवसर मिलेगा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी।’’
उन्होंने कहा कि लगभग 2500 कलाकारों की सहभागिता से रामनगरी में विविध संस्कृतियों का जीवंत स्वरूप दिखाई देगा।
राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। ऐसे में दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की यह पहल रामकथा की वैश्विक स्वीकार्यता को सामने लाने का माध्यम बनेगी।
विभिन्न देशों की रामलीला मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा और जीवन दर्शन को अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में प्रस्तुत किया जाएगा।
बयान के अनुसार, दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या को विश्व के सांस्कृतिक मानचित्र पर और व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
भाषा जफर गोला
गोला
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