मुंबई, छह सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के हालिया खाद्य सुरक्षा संबंधी निर्देशों का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की निगरानी और उसे रोकना है, न कि त्योहारों पर किसी तरह की पाबंदी लगाना। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने यह बात कही।
मुंढे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम त्योहारों को नियंत्रित नहीं कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित हों और 2011 से लागू कानून के अनुरूप हों। यही व्यवस्था शादी समारोह, भंडारा, ईद, क्रिसमस, नववर्ष की पूर्व संध्या के आयोजनों और अन्य समारोहों में भी लागू होती है।’’
खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कई महीनों से चल रही सख्त कार्रवाई के बाद एफडीए ने हाल ही में सालभर के लिए ‘त्योहार प्रवर्तन कैलेंडर’ शुरू किया है। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट पर व्यवस्थित तरीके से नजर रखना है।
मुंढे ने कहा, ‘‘त्योहारों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी स्थायी आदेश के संबंध में कुछ गलतफहमी और आशंकाएं दिखाई दे रही हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह आदेश त्योहारों को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।
आयुक्त ने बताया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ा कानूनी ढांचा, जिसमें खाद्य कारोबार संचालकों (एफबीओ) का पंजीकरण और लाइसेंस शामिल है, वर्ष 2011 से लागू है और कई वर्षों से इसका पालन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान आदेश से न तो कोई नया कानून बनाया गया है, न नयी लाइसेंस व्यवस्था लागू की गई है और न ही त्योहारों पर कोई नयी पाबंदी लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक त्योहारों से जुड़े खाद्य सुरक्षा संबंधी निर्देश अलग-अलग त्योहारों के नजदीक आने पर जारी किए जाते थे।
मुंढे ने बताया कि नए आदेश के तहत पूरे साल के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें सभी समुदायों और धर्मों के त्योहारों तथा बड़े आयोजनों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अधिकारियों, खाद्य विक्रेताओं, कैटरर्स, खाद्य कारोबार संचालकों और आयोजकों की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है।
मुंढे ने कहा कि यह आदेश भंडारा, प्रसाद या सामुदायिक रूप से भोजन वितरण, गणपति उत्सव या अन्य धार्मिक त्योहारों पर रोक नहीं लगाता है और न ही धार्मिक अनुष्ठानों या परंपराओं में किसी तरह का हस्तक्षेप करता है।
भाषा शफीक नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.