नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से संबंधित अभ्यर्थी केंद्र सरकार के अधीन सीधी भर्ती या रोजगार के संबंध में आयु में छूट या अधिक अवसर प्राप्त करने के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के व्यक्तियों द्वारा झेली जाने वाली दिक्कतें जाति-आधारित भेदभाव के बराबर नहीं है।
पीठ ने 16 अप्रैल के अपने फैसले में कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आयु सीमा में विस्तार और छूट नहीं देने की नीति केवल इसलिए ‘‘दुर्भावनापूर्ण, मनमानी या असंवैधानिक’’ नहीं है, क्योंकि इसने विभिन्न आरक्षित श्रेणियों को अलग-अलग छूट प्रदान की थी।
पीठ ने यह फैसला ईडब्ल्यूएस श्रेणी के कुछ व्यक्तियों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें केंद्र सरकार के अधीन सीधी भर्ती या रोजगार में एससी/एसटी/ओबीसी के उम्मीदवारों को उपलब्ध ऊपरी आयु सीमा और अवसरों की संख्या में समान छूट का अनुरोध किया गया था।
यूपीएससी द्वारा 19 फरवरी, 2019 को जारी परीक्षा अधिसूचना के अनुसार, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी के उम्मीदवारों को आयु सीमा में अधिकतम पांच वर्ष की छूट दी गई थी और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को आयु में अधिकतम तीन वर्ष की छूट दी गई थी। इसके अलावा, उन्हें परीक्षा देने के अधिकतम प्रयासों की संख्या में भी कुछ छूट प्रदान की गई थी।
भाषा शफीक सुरेश
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