Thursday, 20 January, 2022
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इरेक्शन, यौन उत्तेजना के संकेत हमेशा ‘सेक्स के लिए हां’ नहीं होते : टिंडर की कोशिश है कि यूजर्स सहमति को समझें

एक नई शॉर्ट फिल्म और एक वेबसाइट आपसी सहमति को स्पष्ट तौर पर परिभाषित करने की टिंडर की ताजा कोशिश का हिस्सा है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय इस एप का इस्तेमाल कर करते हैं, और खासकर कोविड महामारी जारी रहने से यह और बढ़ा है.

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नई दिल्ली: ‘उस रात…मैं यह नहीं करना चाहती थी’, रिया जब अपने पूर्व ब्यॉयफ्रेंड वेद से यह कहती है तो उसका जवाब होता है, ‘लेकिन, तुमने ना तो नहीं कहा था.’

‘लेकिन मैंने हां भी नहीं कहा…और काश तब एक बार तुमने पूछ लिया होता.’

एक नई शॉर्ट फिल्म में सेक्स को लेकर यह बातचीत सहमति की अहमियत को रेखांकित करने की टिंडर की ताजा कोशिश का हिस्सा है.

गुरुवार को रिलीज हुई शॉर्ट फिल्म ‘क्लोजर’ सहमति के सवाल के साथ शुरू होती है, फिर किसी रात कुछ गलत हो जाने की तरफ इशारा करते हुए युगल के बीच बीते कुछ अच्छे पलों को दर्शाती है. रिया अपनी न भूल पाने वाली स्मृति से परेशान है—जब अंतरंग रिश्ते बनने से पहले दोनों के बीच स्पष्ट सहमति की कमी थी—और मानसिक प्रताड़ना से जूझती दिखाती है. एक साल बीत चुका है और ये बातचीत तब होती है जब रिया इस बात को लेकर वेद से लड़ पड़ती है.

टिंडर के लिए यह फिल्म उसके निरंतर जारी अभियान का हिस्सा है क्योंकि यह एप भारत के डेटिंग बाजार में काफी लोकप्रिय है. एनालिटिक्स प्रदाता सेंसर टॉवर के मुताबिक, सितंबर 2021 तक टिंडर भारत में गूगल प्ले स्टोर पर सबसे ज्यादा कमाई वाली लाइफस्टाइल एप थी.

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अगस्त में कैलिफ़ोर्निया स्थित कंपनी ने एक वैश्विक रिपोर्ट, ‘द फ्यूचर ऑफ डेटिंग इज फ्लूइड’ जारी की, जिसमें उसने बताया कि 2020 उसका अब तक का सबसे व्यस्त वर्ष था. इस एप को 2012 में यूएस में लॉन्च किया गया था और 2016 में यह भारतीय बाजार में आई.

रिपोर्ट में जनवरी 2020 से फरवरी 2021 तक का डाटा शामिल है. सितंबर से नवंबर 2020 के बीच भारत में 2000 सिंगल लोगों और उसी वर्ष 6-12 मई और 14-24 अगस्त के बीच लगभग 5000 टिंडर यूजर पर सर्वेक्षण किया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, टिंडर ने पाया कि महामारी के बीच बीते साल में यूजर्स से पोटेंशियल यूजर से 11 प्रतिशत अधिक प्रोफाइल और प्रति यूजर 42 प्रतिशत अधिक मैच चेकआउट किए. इसने यह भी नोट किया कि फरवरी 2020 की तुलना में फरवरी 2021 में प्रतिदिन 19 फीसदी अधिक मैसेज भेजे गए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी ने यूजर्स को लोगों को मिलने-जुलने के लिए तरसा दिया है, साथ ही जोड़ा, ‘60% सदस्य टिंडर पर इसलिए आए क्योंकि वे अकेला महसूस कर रहे थे और लोगों से जुड़ना चाहते थे.’

जब डेट अपराधों में बदल गईं

अपराध की घटनाओं को देखकर ही टिंडर ने सहमति पर ज्यादा जोर देने की तरफ कदम बढ़ाया है.

क्लोजर में जिस तरह की घटना को विस्तृत से दर्शाया गया है, टिंडर की लोकप्रियता को देखते हुए इसके जरिये जुड़े कपल के बीच ऐसी घटनाएं होने की संभावना ज्यादा है; एनालिटिक्स फर्म स्टेटिस्टा के डेटा से पता चलता है कि 2018 तक टिंडर भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली डेटिंग ऐप थी.

पिछले साल, बलात्कार और जबरन वसूली की दो घटनाएं हुईं जो टिंडर पर डेटिंग से जुड़ी थीं.
दिसंबर 2020 की इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक घटना पुणे की थी, जहां एक एयर होस्टेस के साथ उसकी डेट ने कथित तौर पर बलात्कार किया था.

इससे पहले, नवंबर में मुंबई मिरर ने जानकारी दी थी कि एक व्यक्ति ने अपनी डेट के खिलाफ साथियों के साथ मिलकर 9 लाख रुपये कीमत की नगदी और आभूषण लूटने का मामला दर्ज कराया है.


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एनडीटीवी 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यद्यपि इस बारे में कोई सार्वजनिक टाडा उपलब्ध नहीं है कि भारत में कितने टिंडर यूजर हैं लेकिन कंपनी का कहना है कि एप का सबसे अधिक उपयोग पुणे में किया जाता है. टिंडर के मुताबिक, दुनियाभर में इस एप के 50 प्रतिशत से अधिक यूजर 18 से 25 वर्ष के बीच उम्र के हैं.

टिंडर एंड मैच ग्रुप इन इंडिया की तरफ से गुरुवार को जारी एक प्रेस नोट में जनरल मैनेजर तरुण कपूर ने कहा, ‘हम ऐप पर और बाहर भी एक सम्मानित सदस्यों वाला इकोसिस्टम बनाने के मिशन पर हैं. आपसी सहमति के बाबत बना यह मंच रिश्तों में उत्साह के साथ ‘हां’ की अहमियत को समझता है और खुलकर, ईमानदारी से और संवेदनशील बातचीत की जरूरत को समझाने में एक मजबूत भागीदारी बनने का इरादा रखता है.’

सहमति को कैसे समझें

टिंडर की तरफ से जारी किए गए एक प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि ‘सहमति की अहमियत को प्रोत्साहित करने के लिए एक रिसोर्स सेंटर www.letstalkconsent.com के साथ मिलकर जारी टिंडर की पहल आगे बढ़ाते हुए’ ही उसने क्लोजर को प्रोड्यूस किया है. फिल्म जुगाड़ मोशन पिक्चर्स की तरफ से बनाई गई है, और इसका निर्देशन रिया सिंह ने किया है.
Letstalkconsent.com सहमति को समझने पर फोकस करते हुए यूजर्स को विभिन्न परिदृश्यों में अपने खुद के अनुभव पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है, और यह समझने का मौका देती है कि ऐसे कौन से तरीके हैं जिनसे स्वस्थ और सुरक्षित अंतरंगता बनाई जा सकती है.

इसमें बताया गया है, ‘सहमति वास्तव में एक बहुत सरल चीज होती है. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि किसी अंतरंग गतिविधि के लिए सामने वाले की अनुमति लेना. कभी-कभी सहमति शब्दों से जताई जाती है, कभी-कभी क्रियाओं के साथ…यदि आप पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हैं कि आपका साथी किसमें सहज हैं, तो बस पूछें.’

यह जोड़ता है, ‘इरेक्शन या यौन उत्तेजना के अन्य लक्षण बहुत स्पष्ट लग सकते हैं, लेकिन इन्हें सहमति नहीं माना जाता है, यदि वे अनैच्छिक हों.’

इसमें कुछ बातों को आसानी से समझने के लिए बुलेट प्वाइंट में भी दिया गया है, जिसमें यह बात रेखांकित की है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की (नाबालिग) के साथ यौन संबंध को ‘कानून के तहत बलात्कार’ माना जाता है, भले ही स्पष्ट तौर पर सहमति क्यों न दी गई हो.

सहमति के महत्व पर टिंडर द्वारा निर्मित लघु फिल्म ‘क्लोजर’ का एक दृश्य | यूट्यूब[/कैप्शन]
एक सेक्शन में टिंडर यह स्पष्ट करता है कि सहमति कैसे दें, ‘यदि आप यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आपका साथी किसी खास सेक्स एक्टिविटी को लेकर उत्साहित है या नहीं, तो उससे पूछें. याद रखें, ‘नहीं’ न कहने का मतलब ‘हां’ नहीं है.’
इसके अलावा, वेबसाइट पाठकों को कोई भी सेक्स एक्टिविटी शुरू करने से पूरे ‘उत्साह से सहमति’ बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है.

उत्साह से सहमति हासिल करने के लिए नियमित तौर पर मौखिक सहमति लेना जरूरी है. उदाहरण के तौर पर, ‘आगे बढ़ने से पहले यह पूछना चाहिए कि क्या कोई नया सेक्स एक्ट ठीक है’, और ‘जब आप अपने साथी की किसी सेक्स एक्टिविटी को पसंद कर रहे हों तो खुलकर उस बारे में बोलें.’

Letstalkconsent.com को इस साल 31 अगस्त को युवाओं पर केंद्रित मुंबई स्थित कंटेंट प्रोडक्शन कंपनी युवा के कोफाउंडर और सीईओ निखिल तनेजा ने लॉन्च किया था.

तनेजा ने ट्वीट किया था कि महिला अधिकारों से जुड़े मामलों पर काम करने वाली एक वेबसाइट पिंक लीगल के साथ मिलकर सहमति पर वन-स्टॉप रिसोर्स पूल बनाने के लिए टिंडर इंडिया के साथ भागीदारी की है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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