भोपाल, 25 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2025 बैच के आठ अधिकारियों को आदिवासी एवं चुनौतीपूर्ण ग्रामीण जिलों में सहायक जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ किया है और उन्होंने इन क्षेत्रों को जमीनी स्तर पर प्रशासन की ‘‘असली पाठशाला’’ बताया।
मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकसेवा की भावना की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह महज एक नियुक्ति नहीं, बल्कि सुविचारित, योजनाबद्ध और अत्यंत सार्थक पहल है।’’
मंडलोई ने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि जो अधिकारी अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, वंचित वर्गों की आकांक्षाओं और आदिवासी क्षेत्रों की जटिल प्रशासनिक चुनौतियों से रूबरू होते हैं, वे भविष्य में संवेदनशील, परिश्रमी और जनोन्मुखी प्रशासक बनते हैं।
उन्होंने कहा कि बालाघाट, मंडला, डिण्डौरी, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, अनूपपुर और श्योपुर जैसे आदिवासी जिले प्रशासन के लिए कठिन परीक्षा स्थल हैं।
अधिकारी ने कहा कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति, वन क्षेत्र, विविध आदिवासी संस्कृति और विकास संबंधी आवश्यकताएं — ये सभी मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जहां युवा अधिकारी केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव से सीखते हैं।
सहायक जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ 2025 बैच के अधिकारियों में आयुषी बंसल (झाबुआ), आशी शर्मा (धार), माधव अग्रवाल (बड़वानी), सोम्या मिश्रा (सिंगरौली), श्लोक वैकर (कटनी), शिल्पा चौहान (खंडवा), खोत पुष्पराज नानासाहेब (बैतूल) और शैलेंद्र चौधरी (मंडला) शामिल हैं।
भाषा दिमो खारी
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