नई दिल्ली: भारत में कथित अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई ट्रस्टों और इस्लामिक मदरसों पर छापे मारे. एजेंसी का आरोप है कि ये संस्थाएं रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए भारत में घुसपैठ कराने में मदद कर रही थीं.
ईडी के मुताबिक, इन संस्थाओं ने कथित तौर पर भारत में इन लोगों को गैरकानूनी तरीके से बसाने में मदद की. एजेंसी का आरोप है कि इनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे फर्जी दस्तावेज बनवाकर उनकी झूठी पहचान तैयार कराई गई.
जिन संस्थाओं पर कार्रवाई हुई, उनमें पश्चिम बंगाल के कालिकापुर स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम, उत्तर 24 परगना का ताहिरिया वेलफेयर ट्रस्ट, कबीरबाग मिल्लत अकादमी, और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद में मदीनी मस्जिद के पास स्थित मोहल्ला-महल शामिल हैं.
ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि ये कथित सिंडिकेट सीमा से लगे जिलों में काम करते थे. कथित घुसपैठियों की स्थायी कमाई के लिए उन्हें पैसे, ई-रिक्शा, नौकरी या नकद मदद दी जाती थी.
ये छापे ईडी के लखनऊ जोन कार्यालय ने मारे. एजेंसी के मुताबिक, हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम के दफ्तर से 40 लाख रुपये नकद और उसकी लाइब्रेरी से 180 ग्राम वजन के सोने के सिक्के मिले.
एक अधिकारी ने कहा, “छापों के दौरान मिले डिजिटल उपकरणों और आपत्तिजनक दस्तावेजों की जांच की जा रही है. साथ ही, मुख्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं.”
‘ब्रिटेन से आ रहा था पैसा’
ईडी के मुताबिक, यह कथित नेटवर्क FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत रजिस्टर्ड पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्टों के जरिए काम करता था. इन ट्रस्टों को ब्रिटेन की संस्थाओं से फंड मिलता था.
अधिकारी ने कहा, “इसके बाद यह पैसा 6,000 से 10,000 रुपये की छोटी-छोटी किस्तों में संदिग्ध लोगों को भेजा जाता था, ताकि वे भारत में बस सकें.”
उन्होंने कहा, “मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए आए इस पैसे का इस्तेमाल कथित अवैध प्रवासियों को आर्थिक रूप से बसाने और उन्हें भारत में स्थायी रूप से रहने में मदद देने के लिए किया जाता था.”
ईडी के मुताबिक, जांच में पता चला कि पश्चिम बंगाल के सीमा वाले इलाके में एक समूह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ कराने में लगा था.
अधिकारी ने कहा, “एक दूसरा समूह इन कथित घुसपैठियों के लिए सभी ज़रूरी दस्तावेज़ तैयार करता था. इसके बाद उन्हें रोजगार या दूसरे कामों के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता था.”
ईडी का यह मामला उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि एक संगठित गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में कथित अवैध घुसपैठ कराने में मदद कर रहा था.
अधिकारी ने कहा, “यह एक गहराई तक फैला वित्तीय नेटवर्क है, जिसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल हैं. इन्हें विदेश से बड़ी रकम मिलती है और फिर कई बैंक खातों, फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट) और कई स्तरों वाले लेनदेन के जरिए इस पैसे का इस्तेमाल कथित गैरकानूनी गतिविधियों में किया जाता है.”
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