Thursday, 8 December, 2022
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ED केस, राउत की गिरफ्तारी- आखिरकार 14 साल बाद मुंबई के पात्रा चॉल प्रोजेक्ट पर काम फिर से शुरू हुआ

पिछले महीने MHADA ने भूखंड के अपने हिस्से पर बनाए जाने वाली इमारतों के लंबित काम को पूरा करने के लिए बोलियां मांगी थीं. प्राधिकरण ने 672 पात्रा चॉल निवासियों के पुनर्वास के लिए भी इमारतों के निर्माण का काम शुरू कर दिया है.

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मुंबई: महाराष्ट्र आवास प्राधिकरण ने 14 साल पहले गोरेगांव में पात्रा चॉल का पुनर्विकास कार्य करना शुरू किया था. लेकिन विवादों में फंसने के बाद यह परियोजना ठप हो गई और इस पर कोई काम नहीं हो पाया. अब यह काम फिर से शुरू हुआ है और प्राधिकरण इसे पूरा करने की प्रक्रिया में है.

पिछले महीने महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाड) ने भूखंड के अपने हिस्से पर इमारतों पर लंबित काम को पूरा करने के लिए बोलियां मांगी थीं. म्हाड की जमीन के हिस्से पर बने घर शहर के कम लागत वाले आवास स्टॉक में जोड़ दिए जाएंगे.

म्हाड ने 672 पात्रा चॉल निवासियों के पुनर्वास के लिए इमारतों के निर्माण का काम भी शुरू कर दिया है.

म्हाड के मुंबई बोर्ड के मुख्य अधिकारी योगेश म्हासे ने दिप्रिंट को बताया, ‘भूमि के म्हाड हिस्से की इमारतें आंशिक रूप से तैयार हैं. हमने काम पूरा करने और उनकी स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच करने के लिए बोलियां मांगी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हमने उन इमारतों को भी पूरा करना शुरू कर दिया है जिनमें पात्रा चॉल के निवासियों को स्थायी घर दिए जाएंगे. ये अगले दो सालों में तैयार हो जाने चाहिए.’

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पात्रा चॉल प्रोजेक्ट उस समय राजनीतिक विवाद में फंस गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 अगस्त को पुनर्विकास परियोजना के संबंध में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को गिरफ्तार किया था.

म्हाड ने 2008 में परियोजना शुरू की और इसके लिए रियल एस्टेट फर्म हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को अनुबंध दिया गया.

कंपनी को 47 एकड़ में फैली चाल के भूखंड का पुनर्विकास करना, 672 परिवारों का पुनर्वास, भूखंड के एक हिस्से पर म्हाड को सौंपने के लिए कम लागत वाला आवास स्टॉक बनाना और बाकी बचे हिस्से को बेचना था.

लेकिन डेवलपर ने प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच लिया और कथित तौर पर 2014-15 के बाद से 672 परिवारों को किराया देना बंद कर दिया. फिर म्हाड ने 2018 में डेवलपर को टर्मिनेशन नोटिस जारी किया.


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यह परियोजना ईडी की जांच के दायरे में है. एजेंसी एचडीआईएल की जांच कर रही है और उसने आरोप लगाया कि संजय राउत के करीबी प्रवीण राउत ने गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर निजी डेवलपर्स को पुनर्वास हिस्से या म्हाड के फ्लैटों के हिस्से का निर्माण किए बिना अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) बेच दिया था.

ईडी ने इस महीने की शुरुआत में दायर अपने आरोप पत्र में दावा किया है कि संजय राउत शुरू से ही पात्रा चॉल परियोजना में शामिल थे और प्रवीण राउत उनके प्रॉक्सी थे.

लॉटरी में बेचे गए म्हाड के हिस्से वाले फ्लैट, जो कभी पूरे ही नहीं हुए

एक चॉल सस्ते आवास मुहैया कराने के लिए छोटे फ्लैट वाली एक बड़ी इमारत होती है.

म्हाड को कम लागत वाले घरों के तौर पर पात्रा चॉल प्रोजेक्ट से 306 अपार्टमेंट मिलने थे. म्हासे ने दिप्रिंट को बताया कि म्हाड ने 2017-18 में ही अपनी वार्षिक लॉटरी में इन घरों को बेच दिया था. लेकिन प्रोजेक्ट के विवादों में पड़ने के बाद से इनका निर्माण कभी पूरा नहीं हो पाया.

आवास प्राधिकरण ने इन 306 अपार्टमेंटों वाली चार बिल्डिंग का बचा हुआ काम पूरा करने के साथ-साथ इमारत को रिस्टोर करने और उनकी संरचनात्मक स्थिरता की जांच करने के लिए एक निविदा जारी की है. म्हाड से मिली जानकारी के अनुसार, टैक्स को छोड़कर कुल लागत 38.91 करोड़ रुपये आंकी गई है. इस काम के लिए चुने गए ठेकेदार से 30 महीनों में इसे पूरा करने की उम्मीद है.

उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पिछली महा विकास अघाड़ी सरकार ने 672 पात्रा चॉल निवासियों के पुनर्वास को पूरा करने के लिए योजनाओं की सिफारिश के लिए एक सेवानिवृत्त मुख्य सचिव जॉनी जोसेफ के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति नियुक्त की थी.

समिति की सिफारिश के अनुसार, एमवीए सरकार ने म्हाड के अंतर्गत परियोजना को पूरा करने के लिए एक नई योजना बनाई थी और इस साल फरवरी में एक उद्घाटन समारोह आयोजित किया था. म्हासे ने कहा कि पुनर्वास घटक पर काम शुरू हो गया है.

अभी भी कुछ के लिए लंबा इंतजार

होम लोन की किस्तों, मासिक किराए के बोझ और देरी से परेशान, परियोजना के बिक्री वाले हिस्से के लगभग 1,700 खरीदारों ने पिछले सप्ताह बांद्रा पूर्व में म्हाड के मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अपने फ्लैटों पर तत्काल कब्जा करने की मांग की.

म्हाड के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, ‘म्हाड ने प्रोजेक्ट के बेचे जाने वाले हिस्से पर बनी इमारतों के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है क्योंकि वे पहले पुनर्वास घटक और प्राधिकरण के हिस्से में आने वाले घरों को सौंपे बिना बनाए गए थे.’

उन्होंने कहा, ‘इनमें किया पूरा काम म्हाड के साथ किए गए अनुबंध से बाहर है. हमें पहले डेवलपर की ओर से अपनी देनदारी तय करनी होगी, जिसके लिए राज्य सरकार ने एक तकनीकी समिति का गठन किया है.’

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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