नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कार बनाने वाली कंपनी रेनो इंडिया ने बुधवार को कहा कि ई-10 मानक वाले वाहनों में 20 एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) का उपयोग करने वाली उसकी कारों में कोई गंभीर चुनौती नहीं देखी गई है।
कंपनी ने ई-10 मानकों के अनुसार परीक्षण और प्रमाणित वाहनों में ई-20 ईंधन के उपयोग के संबंध में ग्राहकों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) द्वारा संयुक्त रूप से एक परीक्षण किया गया था, जिसमें विभिन्न ईंधन संयोजनों को शामिल किया गया था। इसमें ई-10 मानकों के अनुसार प्रमाणित वाहनों में ई-20 ईंधन का उपयोग भी शामिल था।
इस अध्ययन के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मसौदे में यह निष्कर्ष निकाला गया कि ई-10 मानक वाले वाहनों में ई-20 ईंधन के उपयोग से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। इस रिपोर्ट को सभी मूल उपकरण विनिर्माता कंपनियों के साथ साझा किया गया था। इसमें यह माना गया कि वर्तमान में सड़क पर चल रहे वाहन ई-20 मानकों के अनुरूप हैं।
कंपनी ने कहा, ‘‘इन निष्कर्षों के आधार पर, ई-10 मानक वाले और परीक्षण किए गए वाहनों में ई-20 ईंधन का उपयोग करके सड़कों पर चलने वाली रेनो कार में कोई गंभीर चुनौती नहीं देखी गई है।’’
रेनो इंडिया ने कहा कि तत्कालीन प्रचलित मानदंडों के अनुसार, 2022 के रेनो ट्राइबर मॉडल के प्रकार अनुमोदन और उत्पादन परीक्षण के प्रयोजनों के लिए ई-10 घोषित ईंधन था।
कंपनी वर्तमान में भारतीय बाजार में तीन मॉडल, क्विड, ट्राइबर और काइगर बेचती है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिकों ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर गाड़ियों को हो रहे नुकसान के बारे में लिखा है। बड़ी संख्या में आये ऐसे पोस्ट में कुछ लोगों ने कहा है कि इसके इस्तेमाल से वाहन के माइलेज में करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि कुछ लोगों ने इससे ई-10 वाहनों में रबड़, धातु कलपुर्जों के जल्द खराब होने की आशंका जताई है।
इस चर्चा के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ई-20 ईंधन के कारण ईंधन दक्षता में ‘भारी’ कमी आने की आलोचना गलत है।
वाहन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों में 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से, कारों के प्रकार के आधार पर, ईंधन दक्षता में दो से पांच प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
उनका यह भी कहना है कि जो पुराने वाहन ई-20 मानक के अनुरूप नहीं हैं, उनमें दीर्घकाल में गैसकेट और रबड़ ईंधन पाइप को नुकसान हो सकता है।
भाषा रमण अजय
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