नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) कराधान और प्रक्रियात्मक ढांचों में व्यापक सुधार दिवाला समाधान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के भारतीय दिवाला पेशेवर संस्थान (आईआईआईपीआई) के अध्ययन समूह की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
रिपोर्ट में समाधान योजनाओं को कर तटस्थ उपचार देकर और ऋण माफी को कर देनदारियों से मुक्त करके आयकर अधिनियम को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के साथ जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
आईआईआईपीआई ने एक बयान में कहा कि एक अन्य सुझाव अग्रिम घाटे और न्यूनतम वैकल्पिक कर प्रावधानों पर स्पष्टता लाने से जुड़ा है।
रिपोर्ट में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के मद्देनजर कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया के दौरान निर्बाध इनपुट टैक्स क्रेडिट हस्तांतरण को सक्षम बनाने, समाधान आवेदकों को पुरानी जीएसटी देनदारियों से छूट देने और समाधान प्रक्रिया के दौरान अनुपालन को सरल बनाने की सिफारिश भी की गई है।
भाषा पाण्डेय अजय
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