नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत दर रेपो को बरकरार रखने से रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी, उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा और आवासीय मांग को समर्थन मिलेगा। रियल एस्टेट उद्योग और विशेषज्ञों ने शुक्रवार को यह कहा।
हालांकि उनका यह भी कहना है कि किफायती आवास क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करने के लिए आगे भी सरकार और नीतिगत स्तर पर सहयोग की जरूरत होगी।
आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
रियल एस्टेट कंपनियों का निकाय क्रेडाई (कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष शेखर जी पटेल ने कहा, ‘‘आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला सोच-समझकर लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं…। ऐसे माहौल में आरबीआई का यह फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत है और इससे बाजार में स्थिरता बनी रहने में मदद मिलेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से आवास ऋण लेने वालों को राहत मिलेगी और उनकी ईएमआई पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा…। साथ ही आरबीआई का यह फैसला विकास को गति देने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को भी दर्शाता है।’’
पटेल ने कहा, ‘‘हालांकि किफायती आवास क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच जो अंतर है, उसे कम करने के लिए आगे भी सरकार और नीतिगत स्तर पर सहयोग की जरूरत होगी।’’
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि आरबीआई का रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने से मकान खरीदारों पर आवास ऋण की लागत का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे आवासीय मांग को समर्थन मिलेगा। यह निर्णय डेवलपर को भी बेहतर वित्तीय योजना और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में मदद करेगा।’’
कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक एवं अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा, ‘‘आरबीआई ने फैसला लेते समय पश्चिम एशिया संकट के लंबे खिंचने से उत्पन्न संभावित महंगाई दबाव और आपूर्ति शृंखला पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर होता रुपया रियल एस्टेट सहित विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं। हालांकि वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन लागत के दबाव का असर अब दिखाई देने लगा है और आगे इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।’’
नादर ने कहा, ‘‘ आने वाली कुछ तिमाहियों में रेपो दर और इसके साथ ही आवास ऋण की ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। जहां घर खरीदार कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी आय की स्थिरता का अधिक सख्ती से आकलन कर सकते हैं। वहीं डेवलपर निकट एवं मध्यम अवधि में निर्माण सामग्री की उपलब्धता, नकदी प्रवाह प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन को प्राथमिकता दे सकते हैं।’’
सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लि. के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, ‘‘ वैश्विक अनिश्चितताओं और असंतुलित वैश्विक वृद्धि के माहौल में नीतिगत निरंतरता से व्यापार एवं उपभोक्ता दोनों को आवश्यक स्थिरता मिलती है। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए ब्याज दरों में स्थिरता मांग बढ़ाने वाला एक अहम कदम है, क्योंकि यह सीधे तौर पर घर खरीदने वालों की सोच, खरीदने की क्षमता और लंबे समय के निवेश की योजना पर असर डालती है। ’’
एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा ने कहा, ‘‘यह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए एक संतुलित और सोच-समझकर लिया गया फैसला है। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए यह निर्णय डेवलपर और घर खरीदने वालों दोनों को वित्तीय स्थिरता एवं भरोसा देता है…। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संतुलित नीतिगत रुख अपनाना सही कदम है। ’’
एमआरजी ग्रुप के प्रबंध निदेशक रजत गोयल ने कहा, ‘‘पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आरबीआई का रेपो दर में कोई बदलाव न करना स्थिरता और वित्तीय स्पष्टता लेकर आया है। ब्याज दरों के फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे खरीदार लंबे समय के लिए घर खरीदने का फैसला अधिक भरोसे के साथ ले सकेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नीतिगत स्तर पर स्थिरता रियल एस्टेट क्षेत्र को वास्तविक घर खरीदारों की मांग पर ध्यान देने और आवास क्षेत्र में संतुलित विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।’’
इमामी रियल्टी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नितेश कुमार ने कहा, ‘‘आरबीआई का रेपो दर को यथावत रखने का निर्णय एक संतुलित और दूरदर्शी कदम है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और मुद्रा पर दबाव जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच मौद्रिक नीति समिति द्वारा तटस्थ रुख बनाए रखना घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा। यह निर्णय भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादों में विश्वास को और मजबूत करता है तथा कॉरपोरेट जगत को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का भरोसा देता है।’’
भाषा निहारिका रमण
निहारिका
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