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Saturday, 6 June, 2026
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भारत की कुछ सरकारी एजेंसियों, निजी कंपनियों को एंथ्रोपिक के ‘मिथोस’ मॉडल तक पहुंच मिली

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नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र की कुछ भारतीय कंपनियों को अमेरिकी कृत्रिम मेधा (एआई) कंपनी एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल ‘मिथोस’ तक पहुंच मिली है। यह पहुंच कंपनी के ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ कार्यक्रम के विस्तार के तहत दी गई है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि मिथोस तक पहुंच हासिल करने वाले भारतीय संगठनों की संख्या फिलहाल एकल अंक में ही है और इनमें सरकारी एवं निजी, दोनों तरह की संस्थाएं शामिल हैं।

हालांकि, सूत्रों ने मिथोस तक पहुंच हासिल करने वाली भारतीय संस्थाओं के नाम उजागर नहीं किए।

इस संबंध में टिप्पणी के लिए एंथ्रोपिक को भेजे गए ईमेल का अब तक कोई जवाब नहीं आया है।

‘मिथोस’ एंथ्रोपिक का उन्नत एआई मॉडल है, जिसे सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामियों की पहचान करने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

कंपनी के ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ कार्यक्रम का उद्देश्य अहम डिजिटल प्रणालियों को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाना है। इसके तहत चुनिंदा संगठनों को ‘क्लॉड मिथोस प्रीव्यू’ नामक उन्नत एआई मॉडल का उपयोग करने दिया जाता है।

अप्रैल में इस पहल की शुरुआत के समय करीब 50 वैश्विक साझेदारों को इसका हिस्सा बनाया गया था। पिछले सप्ताह इस कार्यक्रम का विस्तार कर 15 से अधिक देशों के लगभग 150 अतिरिक्त संगठनों को इससे जोड़ा गया जिनमें बिजली, जल, स्वास्थ्य, संचार एवं हार्डवेयर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े संस्थान शामिल हैं।

एंथ्रोपिक ने दो जून को एक बयान में कहा था, ‘‘नए साझेदारों में कई विक्रेता शामिल हैं। ये ऐसी कंपनियां या गैर-लाभकारी संगठन हैं, जो ऐसे कोडबेस का रखरखाव करते हैं, जिन पर सरकारों समेत दुनिया भर के कई संगठन निर्भर करते हैं।’’

कंपनी ने कहा कि साझेदार संगठन वे होते हैं, जिन पर सफल साइबर हमले का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और कुछ मामलों में इससे 10 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं।

मिथोस मॉडल तक पहुंच मिलने से भागीदार संगठनों को अपने डिजिटल ढांचे में सुरक्षा खामियों का पता लगाने, सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करने और कमजोर सॉफ्टवेयर प्रणालियों में तेजी से सुधार करने में मदद मिलेगी।

कंपनी के अनुसार, इस पहल के तहत अब तक 10,000 से अधिक गंभीर सॉफ्टवेयर खामियों की पहचान की जा चुकी है।

इस बीच, एंथ्रोपिक ने अपने एक ब्लॉग में अग्रणी एआई प्रयोगशालाओं से एआई के तेज विकास को लेकर सावधानी बरतने का अनुरोध किया है।

कंपनी ने कहा कि अत्यधिक उन्नत एआई प्रणालियां भविष्य में अपनी क्षमता को खुद ही तेजी से बढ़ा सकती हैं, जिससे मानवीय निगरानी से आगे निकलने की स्थिति बन सकती है और व्यापक सामाजिक जोखिम पैदा हो सकते हैं।

भाषा

प्रेम दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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