नई दिल्ली: गुरुवार को घोषित कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची को देखकर लगता है कि पार्टी नेतृत्व के करीब होना उम्मीदवार चुनने का सबसे बड़ा आधार रहा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद भी सात उम्मीदवारों में शामिल हैं.
ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस की अध्यक्ष और पार्टी के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती को तमिलनाडु से उम्मीदवार बनाया गया है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ कांग्रेस के गठबंधन का सबसे बड़ा फायदा उन्हें मिला है.
तमिलनाडु चुनाव से पहले चक्रवर्ती ने विजय से मुलाकात की थी और दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन की संभावना तलाशने की कोशिश की थी. हालांकि, उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने अपने पुराने सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ ही बने रहने का फैसला किया था.
लेकिन तमिलनाडु में TVK के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद कांग्रेस ने तेजी से DMK से दूरी बना ली और TVK को समर्थन दे दिया. विजय ने पहले अपनी सरकार में कांग्रेस के पांच में से दो विधायकों को जगह दी और बाद में राज्यसभा की एक सीट देने पर भी सहमति जताई.
कांग्रेस-TVK गठबंधन से प्रवीण चक्रवर्ती सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं, लेकिन DMK से अलग होने के कारण संसद में विपक्षी एकता की कांग्रेस की कोशिशों को झटका लगा है. DMK ने 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली विपक्षी बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है.
इसके उलट बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों में ज्यादातर ऐसे नेता शामिल हैं जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं. इनमें पंजाब से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया, अरुणाचल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष ताई टागाक, मणिपुर बीजेपी की अध्यक्ष शारदा देवी और गुजरात व मध्य प्रदेश के कई जिला स्तर के नेता शामिल हैं.
ताई टागाक 1980 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे और तभी से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं.
24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा. इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटें, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटें, झारखंड की दो सीटें तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं. नतीजे उसी दिन शाम को घोषित किए जाएंगे.
कांग्रेस के प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा भी उम्मीदवार बनाए गए हैं. हालांकि, वे पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में से एक के रूप में ज्यादा जाने जाते हैं, लेकिन उन्होंने कई साल तक यूथ कांग्रेस में भी काम किया है और संगठन में धीरे-धीरे आगे बढ़े हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि वे राज्यसभा में मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रखेंगे.
सांसद बनने से खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दायर मानहानि और आपराधिक साजिश के मामले में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
कांग्रेस नेतृत्व ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है, जिससे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उम्मीदों को झटका लगा है. इस महीने राज्यसभा में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है.
मीनाक्षी नटराजन 2008 से राहुल गांधी की टीम का हिस्सा हैं. उसी वर्ष राहुल गांधी ने उन्हें AICC सचिव नियुक्त कराया था. हाल ही में उन्हें तेलंगाना का AICC प्रभारी भी बनाया गया है.
राजस्थान कांग्रेस नेता नीरज डांगी को दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला भी पार्टी के कई नेताओं के लिए चौंकाने वाला रहा. नीरज पहले कई चुनाव हार चुके हैं. पूर्व राजस्थान मंत्री दिनेश डांगी के बेटे नीरज ने कई वरिष्ठ नेताओं को पीछे छोड़कर टिकट हासिल किया.
राजस्थान के एक पूर्व कांग्रेस विधायक ने दिप्रिंट से कहा, “नीरज 2003, 2008 और 2018 के विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. इसके बावजूद उन्हें 2020 में राज्यसभा भेजा गया और अब फिर भेजा जा रहा है. वह संसाधनों से भरपूर व्यक्ति हैं, लेकिन पार्टी के लिए उन्होंने ऐसा क्या किया है, यह सिर्फ हाईकमान ही जानता है.”
पार्टी सूत्रों के अनुसार नीरज डांगी को मल्लिकार्जुन खड़गे का भरोसा हासिल है. खड़गे के करीबी सहयोगी और AICC सचिव प्रणव झा को झारखंड से उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं खड़गे खुद कर्नाटक से फिर राज्यसभा जा रहे हैं.
राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर चंद्रचूड़ सिंह का कहना है कि राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन यह दिखाता है कि कांग्रेस का ध्यान चुनावी विस्तार से ज्यादा संगठन को बचाए रखने पर है.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “कई राज्यों में कांग्रेस की जमीनी मौजूदगी सीमित है. इसलिए पार्टी को ऐसे भरोसेमंद और वफादार लोगों को आगे बढ़ाना पड़ रहा है जो संगठन को लंबे समय तक संभाल सकें. पार्टी के लिए फिलहाल टिके रहना सबसे बड़ी जरूरत है.”
उन्होंने कहा, “2024 में कांग्रेस को जो संरचनात्मक फायदे मिले थे, पार्टी उनका पूरा लाभ नहीं उठा पाई. दूसरी तरफ बीजेपी ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. 2029 का रास्ता कांग्रेस के लिए कठिन दिखाई देता है और शायद यही वजह है कि राहुल गांधी ने सूची में इतने वफादार नेताओं को जगह दी है.”
राजनीतिक विश्लेषक राशिद किदवई का कहना है कि कांग्रेस उम्मीदवारों का चयन यह दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व भरोसेमंद और वफादार नेताओं को प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि उसके पास उन्हें सम्मानित करने के विकल्प सीमित हैं.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “कांग्रेस के पास अब अपने वफादार नेताओं को समायोजित करने और पुरस्कृत करने के बहुत कम रास्ते बचे हैं. बीजेपी के पास सत्ता है, मजबूत संगठन है और कई ऐसे मंच हैं जहां नेताओं को जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं. कांग्रेस के पास विकल्प सीमित हैं, इसलिए उसके लिए राज्यसभा वफादारी का इनाम बन गई है.”
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