नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सैकड़ों समर्थकों को संबोधित करते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि देश में धार्मिक आधार पर जो विभाजन है, उसे खत्म किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “हिंदू-मुस्लिम विभाजन से किसी का फायदा नहीं हुआ है.”
उन्होंने बीजेपी द्वारा लगाए जाने वाले उस आरोप पर भी मज़ाक किया, जिसमें कहा जाता है कि उन्हें हंगरी में जन्मे अमेरिकी अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस से फंडिंग मिलती है (बीजेपी कांग्रेस को भी सोरोस से जुड़ा बताती रही है). दीपके ने कहा, “सोरोस की फंडिंग से सिर्फ एक ही स्पीकर का इंतजाम हो पाया.”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आने को लेकर उनका परिवार काफी चिंतित था. उन्होंने कहा, “मेरी मां और बहन रो रही थीं. वे नहीं चाहती थीं कि मैं वापस भारत आऊं, क्योंकि उन्हें डर था कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को नारेबाजी करते समय सावधानी बरतने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि “JNU में कन्हैया के साथ जो हुआ था, वैसा कुछ दोबारा हो.”
जून की भीषण गर्मी के बावजूद जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग जुटे, जहां CJP ने अपना पहला बड़ा प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की प्रवेश परीक्षाएं सही तरीके से कराने में कथित “नाकामी” का मजाक उड़ाते हुए पोस्टर भी उठाए हुए थे.
राजस्थान के अलवर से प्रदर्शन में शामिल होने आए कॉलेज छात्र लक्ष्य वर्मा ने कहा, “मेरी बहन, मेरे दोस्त, सभी NEET की तैयारी कर रहे हैं. इतने सारे अभ्यर्थी आत्महत्या कर लेते हैं, लेकिन उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता.”
हाथ में भगत सिंह की तस्वीर लिए वर्मा ने कहा, “इस देश के छात्र न्याय चाहते हैं. हम जवाबदेही चाहते हैं.”
कॉकरोच के मुखौटे पहने प्रदर्शनकारी “धर्मेंद्र प्रधान, इस्तीफा दो” के नारे लगा रहे थे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात सुरक्षा कर्मियों को कई प्रदर्शनकारियों ने फूल भी दिए. पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर पहले ही प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की थी.
AAP के साथ दीपके का संबंध
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की स्थापना 16 मई 2026 को 30 वर्षीय राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने की थी. यह कदम तब उठाया गया जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” से की थी.
दीपके 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ काम कर चुके हैं. वह मुख्य रूप से पार्टी की सोशल मीडिया टीम में थे और दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में संचार सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
हालांकि, दीपके खुले तौर पर इस संबंध को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि 2023 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने के बाद से उनका AAP से कोई संबंध नहीं रहा है.
शनिवार को प्रदर्शन स्थल पर दीपके और सौरव दास समेत CJP के कई नेता प्रदर्शनकारियों और मीडिया कर्मियों से घिरे रहे.
भीड़ में ज्यादातर कॉलेज छात्र थे, जो इस आंदोलन के Gen-Z और मिलेनियल समर्थकों की मजबूत मौजूदगी को दिखाता है.
प्रदर्शन में शामिल शिक्षिका प्रभा सिंह ने कहा, “हमारे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में महीनों और वर्षों लगा देते हैं, लेकिन अंत में व्यवस्था की विफलता उन्हें निराश कर देती है.”
उन्होंने उन छात्रों की नाराजगी का जिक्र किया जिन्होंने NEET परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के कारण परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए.
सिंह ने कहा, “देश में प्रवेश परीक्षाएं पहले से ही बहुत प्रतिस्पर्धी हैं. बहुत कम सीटों के लिए लाखों छात्र आवेदन करते हैं. ऐसे माहौल में संस्थागत विफलता बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती.”
उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की.
यह प्रदर्शन CJP के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. पार्टी अब सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल होने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सड़कों पर आंदोलन के जरिए डिजिटल नाराजगी को लगातार दबाव में बदलने की कोशिश कर रही है.
परीक्षाओं से परेशान भारत के विशाल युवा वर्ग के लिए इन “कॉकरोचों” ने यह संदेश दे दिया है कि उन्हें इतनी आसानी से दबाया नहीं जा सकता.
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