मुंबई, एक मार्च (भाषा) कुल राज्य विकास ऋण (एसडीएल) उधारी में ‘रीइश्यू’ (पुनर्निर्गम) की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो गई है। यह पिछले सात साल का उच्चतम स्तर है। इससे पता चलता है कि राज्यों में अपनी बढ़ी हुई वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा प्रतिभूतियों को फिर से खोलने का रुझान बढ़ रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के आधार पर पीटीआई-भाषा द्वारा संकलित जानकारी के अनुसार, राज्यों ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 10,32,788.8 करोड़ रुपये के एसडीएल निर्गम में लगभग 1,90,970 करोड़ रुपये पुनर्निर्गम के जरिये जुटाए।
यह अनुपात वित्त वर्ष 2019-20 में दर्ज 17.29 प्रतिशत से अधिक है और पिछले कम से कम सात वित्त वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है।
पिछले दो साल के दौरान रीइश्यू पर निर्भरता लगातार बढ़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसकी हिस्सेदारी 12.2 प्रतिशत थी, जहां राज्यों ने कुल 10,73,330.197 करोड़ रुपये की उधारी में 1,30,827.11 करोड़ रुपये फिर से जारी किए थे।
आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले वर्षों के तुलना में काफी अधिक है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 5.73 प्रतिशत, 2022-23 में 7.77 प्रतिशत, 2021-22 में 10.4 प्रतिशत और 2020-21 में 9.72 प्रतिशत था।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
