मुंबई, 26 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास अक्टूबर-दिसंबर, 2022 में दर्ज 267 मामलों में से सिर्फ 15 का निपटान हो सका है। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इन मामलों में कुल दावा राशि की सिर्फ 27 प्रतिशत वसूली हो सकी है।
कोटक सिक्योरिटीज द्वारा आईबीबीआई के हालिया आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, कुल 45 प्रतिशत मामले परिसमापन के जरिये निपटाए गए।
तिमाही आधार पर चालू वर्ष (2022-23) की दूसरी तिमाही में एनसीएलटी में 256 मामले दर्ज किए गए, जो वित्त वर्ष 2019-20 में समान समय में दर्ज 2,000 मामलों के बहुत कम है।
विश्लेषण के अनुसार, कुल परिसमापन में से एक-तिहाई मामले ऐसे थे जिनमें कोई समाधान योजना नहीं मिली थी। अब तक निपटाए गए कुल 1,901 मामलों में से 1,229 में बैंकों ने परिसमापन को अपनाने का निर्णय लिया, जबकि 600 मामलों में समाधान योजना प्राप्त नहीं हुई। वहीं 56 मामलों में समाधान योजना नियमों का पालन नहीं करने के कारण खारिज कर दी गई और शेष 16 मामलों में देनदार ने समाधान योजना के प्रावधानों का उल्लंघन किया।
इसके साथ ही, परिसमापन के तहत निपटाए गए 76 प्रतिशत मामले या तो सक्रिय नहीं थे या पूर्व में बीआईएफआर (औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड)-पश्चात प्रक्रिया का हिस्सा थे और शेष के लिए अन्य कारण थे।
रिपोर्ट में बताया गया कि तीसरी तिमाही में 267 बंद मामलों में से लगभग 45 प्रतिशत मामलों का निपटारा परिसमापन के माध्यम से किया गया, जबकि सिर्फ 15 प्रतिशत मामलों को स्वीकृत दावों के साथ समाधान किया गया। खास बात यह है कि इन मामलों में लेनदारों को 73 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, समाधान प्रक्रिया का समय अब भी बहुत अधिक बना हुआ है लेकिन वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में दर्ज सर्वाधिक समय से कुछ कम हुआ है।
भाषा अनुराग अजय
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