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Wednesday, 14 January, 2026
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शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस दोबारा शुरू करने का आरबीआई ने प्रस्ताव रखा

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मुंबई, 13 जनवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को दो दशक से अधिक समय बाद शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इसमें 300 करोड़ रुपये की न्यूनतम पूंजी सहित कड़े नियामकीय मानदंड रखने का प्रावधान शामिल है।

आरबीआई ने वर्ष 2004 से शहरी सहकारी बैंकों के लिए नए लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया था। उस समय यह देखा गया था कि नए लाइसेंस पाने वाले बैंक बड़ी संख्या में अल्पावधि में ही वित्तीय रूप से कमजोर हो गए थे।

पिछले साल अक्टूबर में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि बीते 20 वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों और हितधारकों की बढ़ती मांग को देखते हुए नए यूसीबी लाइसेंस पर एक चर्चा पत्र जारी किया जाएगा।

उसी कड़ी में आरबीआई ने ‘शहरी सहकारी बैंकों का लाइसेंसिंग’ विषय पर चर्चा पत्र जारी किया। इस पर 13 फरवरी, 2026 तक हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं।

आरबीआई ने पिछले वर्षों में गैर-व्यवहार्य यूसीबी के विलय और बंदी के जरिये शहरी सहकारी बैंकों को समेकित किया है। पहली श्रेणी से लेकर तीसरी श्रेणी के शहरों में संचालित हो रहे 57 दिवालिया यूसीबी के बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए गए।

फिलहाल 82 कमजोर यूसीबी निगरानी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। इनमें से 28 बहुत कमजोर बैंकों को सर्व-समावेशी निर्देश (एआईडी) के तहत रखा गया है जबकि 32 बैंक त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) और 22 बैंक निगरानी कार्रवाई प्रारूप (एसएएफ) के तहत हैं।

आरबीआई ने तर्क दिया है कि चूंकि अधिकतर विफलताएं छोटे यूसीबी में देखी गई हैं, लिहाजा लाइसेंस प्रक्रिया दोबारा शुरू होने पर केवल बड़ी सहकारी ऋण समितियों को ही बैंक लाइसेंस देना विवेकपूर्ण होगा। ऐसी संस्थाओं के प्रदर्शन का लंबा रिकॉर्ड होता है और उनका प्रशासनिक ढांचा भी अधिक मजबूत माना जाता है।

चर्चा पत्र के मुताबिक, मुद्रास्फीति समायोजन और आंतरिक कार्य-समूह की मंशा को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम पूंजी प्रावधान को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये निर्धारित किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, आवेदन करने वाली सहकारी ऋण समिति के पास कम-से-कम 10 वर्षों का सक्रिय संचालन अनुभव और पांच वर्षों का अच्छा वित्तीय रिकॉर्ड जरूरी होगा।

वित्तीय मानकों के तहत, आवेदन के समय उसका पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) न्यूनतम 12 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

आरबीआई ने कहा कि 31 मार्च, 2025 तक देश में 1,457 यूसीबी कार्यरत थे, जिनकी कुल परिसंपत्तियां 7.38 लाख करोड़ रुपये और कुल जमा 5.84 लाख करोड़ रुपये रही।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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