श्रीनगर, नौ अक्टूबर (भाषा) डाकघर अब केवल पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि निर्यातकों और कारीगरों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में भी मदद करते हुए विभिन्न सेवाएं देने वाले केंद्र बनकर उभरे हैं। जम्मू कश्मीर सर्किल के मुख्य डाक महाप्रबंधक सागर हनुमान सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
सिंह ने पोस्टल लॉजिस्टिक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि डाक घर निर्यात केंद्र (डीएनके) जम्मू कश्मीर से अंतरराष्ट्रीय निर्यात को सुगम बना रहा है।
मुख्य डाक महाप्रबंधक ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह पहल निर्यातकों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को निर्यात संबंधी दस्तावेज तैयार करने, डाक निर्यात बिल बनाने, सीमा शुल्क मंजूरियां, पैकेजिंग, बुकिंग तथा सामान की स्थिति पर नजर रखने में मदद करती है।
सिंह ने कहा कि डाकघर निर्यात केंद्र के जरिये अखरोट, केसर, हस्तशिल्प, कालीन, पश्मीना और हथकरघा उत्पादों जैसे स्थानीय सामान को डाक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय डाक विभाग नौ से 15 अक्टूबर तक राष्ट्रीय डाक सप्ताह मना रहा है। इसकी शुरुआत नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के साथ हुई।
सिंह ने कहा कि भारतीय डाक पारंपरिक डाकघरों को नागरिकों को व्यापक सेवाएं देने वाले केंद्रों में बदल रहा है। डिजिटलीकरण, आधुनिक डाक सॉफ्टवेयर, सामान की स्थिति पता लगाने की सुविधा, कंप्यूटरीकृत कामकाज और प्रमुख डाकघरों में स्वयं बुकिंग करने वाली कियोस्क मशीनों से कामकाज की दक्षता और ग्राहकों की सुविधा बढ़ रही है।
भाषा यासिर रमण
रमण
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.