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Friday, 20 February, 2026
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नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘पूर्ण एआई ढांचा’ बनाने की योजना : जयंत चौधरी

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नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार नवाचार की अगली लहर को गति देने के लिए अनामीकृत (एनॉनिमाइज़्ड) डेटा सेट पर आधारित एक “पूर्ण एआई ढांचा” बनाने पर विचार कर रही है। शोधकर्ताओं और स्टार्टअप को इस तक पहुंच दी जाएगी।

मंत्री ने एआई प्रणालियों के लिए एक ‘ऑडिट ट्रेल’ तंत्र विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा और सुझाव दिया कि भविष्य में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) जैसे संस्थान एआई मॉडल पर ऑडिट रिपोर्ट जारी कर जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं।

पूर्ण एआई ढांचे (कम्प्लीट एआई स्टैक) का अर्थ है हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटा और सेवाओं का ऐसा समग्र तंत्र जो कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित अनुप्रयोगों के डिजाइन, प्रशिक्षण, तैनाती एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक हो।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री तथा शिक्षा राज्य मंत्री चौधरी ने डेटा सेट के वर्गीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “ भारत सरकार के निर्धारित दिशा-निर्देश हैं। शिक्षा के क्षेत्र में हम एक पूर्ण एआई ढांचा बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि अनामीकृत डेटा सेट शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि नवाचार की विभिन्न परतों में मूल्य सृजन हो सके और स्टार्टअप उस डेटा के साथ काम कर सकें, जिसे सरकार और नागरिकों ने साझा किया है।’’

मंत्री ने कहा कि नए एआई मॉडल के लिए ‘ऑडिट ट्रेल’ होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “संभव है कि भविष्य में कैग सभी एआई मॉडल पर ऑडिट रिपोर्ट जारी करे। यह एक साहसिक नया भविष्य है, लेकिन बड़े पैमाने पर साझेदारी का संतुलन भी जरूरी है।’’

भारत की एआई पहल में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल की भूमिका का उल्लेख करते हुए चौधरी ने कहा कि पीपीपी में सबसे महत्वपूर्ण ‘पी’ यानी “पीपल” (लोग) हैं, जो मानव और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े शुरुआती नीतिगत विमर्श जैसे गोपनीयता, भरोसा, डेटा संप्रभुता और रोजगार पर प्रभाव के दौरान भारत ने नवाचार को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।

उन्होंने कहा, “ सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं, लेकिन हम नवाचार की संभावनाओं को बाधित नहीं करना चाहते।’’

‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत देश ने प्रारंभ में 18,000 जीपीयू का लक्ष्य रखा था, जिसे पार करते हुए यह संख्या 38,000 से अधिक हो चुकी है। वर्ष के अंत तक कंप्यूट क्षमता एक लाख जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) से अधिक होने का अनुमान है।

चौधरी ने कहा, “यह पूरी ‘कंप्यूट’ सुविधा पीपीपी मॉडल पर आधारित है। इसे शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि हमारे प्रमुख संस्थानों में वास्तविक शोध को बढ़ावा मिल सके।”

उन्होंने इसे भारत में अकादमिक और उद्योग के सहयोग के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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