मुंबई, 17 अप्रैल (भाषा) टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक इकाई में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों की पुलिस जांच के बीच सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि उसे इस मामले में आंतरिक स्तर पर कोई शिकायत नहीं मिली है।
टीसीएस ने एक बयान में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार कंपनी को वैसी कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।
बयान में कहा गया, ”नासिक इकाई से संबंधित प्रणालियों और रिकॉर्ड की प्रारंभिक समीक्षा से पता चलता है कि हमें हमारे एथिक्स या पोश (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर उस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।”
देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी ने एक निगरानी समिति बनाने और अपनी आंतरिक जांच में बाहरी संस्थाओं को शामिल करने की भी घोषणा की।
बयान के अनुसार कंपनी निदेशक मंडल के स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री इस निगरानी समिति की अध्यक्षता करेंगे। इसमें आगे कहा गया कि मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में आंतरिक जांच की रिपोर्ट समीक्षा और सिफारिशों को लागू करने के लिए निगरानी समिति के सामने पेश की जाएगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि आंतरिक जांच में स्वतंत्र परामर्शदाता के रूप में काम करने के लिए परामर्श फर्म डेलॉयट और कानूनी फर्म ट्राईलीगल की सेवाएं ली गई हैं।
इस बीच, कंपनी ने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले में आरोपी के रूप में नामित कर्मचारियों में से एक निदा खान मानव संसाधन प्रबंधक नहीं हैं, जैसा कि कुछ खबरों में बताया जा रहा है। वह एक प्रोसेस एसोसिएट हैं और उन्होंने कभी कोई नेतृत्व वाली भूमिका नहीं निभाई है।
टीसीएस ने इकाई के बंद होने की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि नासिक इकाई का संचालन और ग्राहकों को सेवाएं देना जारी है।
बयान में कहा गया, ”टीसीएस कर्मचारी कल्याण और संस्थागत आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करती है। हम प्रत्येक कर्मचारी की सुरक्षा, गरिमा और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
टीसीएस ने कहा कि उसकी किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या दुराचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति है।
बयान में कहा गया कि कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है, ताकि मामले की गहन और पारदर्शी जांच हो सके और सच सामने आ सके।
भाषा पाण्डेय रमण
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