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Sunday, 25 October, 2026
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कारोबार में विविधता लाना चाहती है एनएमडीसी, चार महाद्वीपों पर खनन संपत्तियों की तलाश

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(अभिषेक सोनकर)

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) देश की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी अब अपने कारोबार में विविधता लाने का प्रयास कर रही है। कंपनी दक्षिण अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक चार महाद्वीपों में खनन परिसंपत्तियों की तलाश कर रही है। इनमें लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और महत्वपूर्ण खनिज जैसे खनिज के भंडार भी शामिल हैं।

कंपनी का उद्देश्य भविष्य में वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इस्पात जैसे तेजी से बढ़ते उद्योगों की कच्चे माल संबंधी जरूरतों को पूरा करना है।

उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, एनएमडीसी चिली, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, ब्राजील और एशिया के कुछ हिस्सों में लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और महत्वपूर्ण खनिज के खनन क्षेत्रों की संभावनाएं तलाश रही है। इसके अतिरिक्त, कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, भूटान और ऑस्ट्रेलिया में चूना पत्थर, डोलोमाइट, कोकिंग कोयला और टंगस्टन के खनन ब्लॉक की भी खोज कर रही है।

वर्तमान में एनएमडीसी भारत की लौह अयस्क मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा पूरा करती है। हालांकि, कंपनी अब लौह अयस्क पर अपनी निर्भरता कम करते हुए खनिज कारोबार के अन्य क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है। कंपनी ने भविष्य में अपने कुल राजस्व का कम से कम 20 प्रतिशत लौह अयस्क के अलावा अन्य खनिजों की बिक्री से हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

एनएमडीसी ने इस संबंध में कहा, ‘‘फिलहाल हमारा कारोबार 99.9 प्रतिशत लौह अयस्क पर आधारित है। हमारा लक्ष्य देश के तेजी से बढ़ते उद्योगों की अधिकतम खनिज जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।’’

इससे पहले पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताव मुखर्जी ने भी कंपनी के कारोबार में विविधता लाने की रणनीति की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि एनएमडीसी देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी बनने के साथ-साथ लौह अयस्क से इतर खनिजों से भी उल्लेखनीय राजस्व अर्जित करना चाहती है।

कंपनी की यह रणनीति केंद्र सरकार की उन पहल के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करना है। लिथियम, कोबाल्ट और महत्वपूर्ण खनिज की उपलब्धता इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के उत्पादन के लिए विशेष रूप से अहम है।

इस्पात क्षेत्र के लिए भी कच्चे माल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। इस्पात मंत्रालय के इस्पात नीति दृष्टिकोण के मसौदे, 2047 के अनुसार, इस्पात उत्पादन की कुल लागत में कच्चे माल की हिस्सेदारी लगभग 65 से 70 प्रतिशत होती है। नीति में घरेलू खनन बढ़ाने, कोल वॉशरी के विस्तार, खनन परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित कोयला मिश्रण अनुकूलन के माध्यम से आयात निर्भरता घटाने पर जोर दिया गया है।

सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन तथा औद्योगिक गलियारों के विकास से देश में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है। इससे वाहन उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पादों, मशीनरी, जहाज निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और रक्षा उत्पादन में इस्पात की मांग बढ़ सकती है।

भाषा अजय

अजय

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यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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