नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने इस साल अप्रैल में बिजली की मांग 2,30,000 मेगावॉट पहुंचने के अनुमान को देखते हुए सरकार से इसे पूरा करने के लिये अस्थायी व्यवस्था के साथ-साथ व्यापक स्तर पर योजना बनाने को कहा है।
बिजली मंत्रालय ने इस गर्मी के मौसम में बिजली की उच्च मांग को पूरा करने को लेकर कई कदम उठाए हैं। इसमें सभी आयातित कोयला आधारित बिजलीघरों को 16 मार्च, 2023 से 15 जून, 2023 तक पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश देना शामिल है।
इसके अलावा, मंत्रालय ने कोयला आधारित घरेलू बिजलीघरों को घरेलू कोयले में मिश्रण को लेकर इस ईंधन के आयात की भी अनुमति दी है।
विद्युत मंत्रालय की 2023-24 के लिये अनुदान मांगों पर 35वीं रिपोर्ट में ऊर्जा पर संसद की स्थायी समिति ने कहा कि मंत्रालय के अनुसार इस साल अप्रैल में बिजली की मांग 2.30 लाख मेगावॉट पहुंचने का अनुमान है। इसीलिए गैस आधारित बिजलीघरों को सुचारू चलाने के साथ जरूरी व्यवस्था करने की आवश्यकता है।
हालांकि, समिति ने कहा कि देश में बिजली की स्थापित उत्पादन क्षमता चार लाख मेगावॉट से अधिक है। इसके बावजूद बिजली की आपूर्ति की कमी चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गयी है कि देश में अधिकतम मांग को पूरा करने के लिये अस्थायी व्यवस्था के साथ-साथ व्यापक स्तर पर योजना बनाने की जरूरत है। साथ ही जो भी बिजली उत्पादन संसाधन है, उसका अनुकूलतम उपयोग करने की आवश्यकता है।
समिति ने यह भी उम्मीद जतायी कि देश में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का मंत्रालय का प्रयास जल्दी ही सफल होगा।
रिपोर्ट में नई विद्युत नीति को जल्द-से-जल्द अंतिम रूप देने और अधिसूचित करने का सुझाव दिया गया है।
भाषा रमण अजय
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