मुंबई, छह नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार अब 500 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना कारोबार वाली और सरकारी सहायता पाने वाली बड़ी संघीय सहकारी समितियों की प्रबंध समितियों में चार विशेषज्ञ सदस्यों को मतदान के अधिकार के साथ नामित कर सकेगी। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने इस संबंध में एक अध्यादेश जारी किया है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सहकारी समितियां (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के तहत महाराष्ट्र सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 73एएए में संशोधन किया गया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह प्रावधान जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को छोड़कर उन संघीय सहकारी समितियों पर लागू होगा, जिनका सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक है और जिन्हें राज्य सरकार से शेयर पूंजी, ऋण, गारंटी, अनुदान, भूमि या अन्य वित्तीय अथवा गैर-वित्तीय सहायता मिलती है।
संशोधित प्रावधान के तहत राज्य सरकार ऐसी सहकारी समितियों की प्रबंध समितियों में पांच सदस्यों को नामित कर सकेगी। इनमें एक सरकारी अधिकारी और सहकारी समितियों के कामकाज से संबंधित जरूरी अनुभव एवं योग्यता रखने वाले चार विशेषज्ञ शामिल होंगे।
हालांकि, नामित सदस्यों को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे पदों पर नहीं चुना जा सकेगा। चार गैर-सरकारी विशेषज्ञ सदस्यों को प्रबंध समिति की बैठकों में मतदान का अधिकार होगा, जबकि सरकारी अधिकारी बिना मताधिकार के सदस्य के रूप में शामिल होगा।
भाषा पाण्डेय रमण प्रेम
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