नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने सोमवार को उद्योग जगत से शोध एवं विकास (आरएंडडी) पर ध्यान देने और बजट में घोषित 20,000 करोड़ रुपये के कोष का उपयोग अच्छी गुणवत्ता वाले प्रस्तावों के जरिये करने का आग्रह किया।
वित्त मंत्री ने यहां उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सदस्यों के साथ बजट पर आयोजित परिचर्चा में कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निजी क्षेत्र की अगुवाई में शोध एवं विकास गतिविधियों के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या हम उस स्थिति की तरफ बढ़ सकते हैं जहां साल के अंत से पहले इस पूरी राशि का उपयोग करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले प्रस्ताव मौजूद हों।’’
आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) के सचिव ने ऊर्जा बदलाव की दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी और परमाणु ऊर्जा पर उद्योग के साथ काम करने का भी आह्वान किया।
सीतारमण ने शनिवार को बजट 2025-26 की घोषणा करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को निजी क्षेत्र द्वारा संचालित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक कोष के रूप में 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए।
उन्होंने पिछले जुलाई में पेश 2024-25 के पूर्ण बजट में एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं विकास कोष की स्थापना की घोषणा की थी।
वित्त मंत्री ने शनिवार को कहा, ‘‘निजी क्षेत्र द्वारा संचालित शोध, विकास एवं नवाचार पहल को लागू करने के लिए मैं अब 20,000 करोड़ रुपये आवंटित कर रही हूं।’’
इस बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा बजट 2025-26 में घोषित विभिन्न उपायों का लक्ष्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू विनिर्माण और मांग को प्रोत्साहित करके आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक अनिश्चितताओं के संदर्भ में दुनिया की वर्तमान स्थिति, बजट में आपके द्वारा देखे जाने वाले कई प्रस्तावों के पीछे मार्गदर्शक ‘उपकरण’ है, जिसमें व्यापक रूप से चर्चा में आए कर कटौती भी शामिल है।’’
नागेश्वरन ने कहा कि आयकर में कटौती से अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग बढ़ने की संभावना है जिससे निजी क्षेत्र को क्षमता विस्तार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इस तरह से अबतक अपेक्षा से धीमा रहा निजी पूंजीगत व्यय आगे चलकर बढ़ेगा।
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