(वरुण झा)
दावोस, 19 जनवरी (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के मौके पर राजनेताओं व उद्यमियों की भीड़ के बीच भारत के दो युवा अपनी-अपनी कहानियां भी सुना रहे हैं।
एक इस बारे में बता रहा है कि कैसे नागरिक और अधिकारी मिलकर नागरिक व्यवस्था की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और दूसरा भारत में श्रमिक वर्ग के लिए सुगम बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के बारे में जानकारी दे रहा है।
ईशान प्रताप सिंह (22) एक सामाजिक उद्यमी हैं और वैश्विक सामाजिक स्टार्टअप कोऑपरेशन17 के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं। वह विश्व आर्थिक मंच के ‘ग्लोबल शेपर’ हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विश्व स्तर पर चुने गए 40 लोगों में से एक के रूप में डबल्यूईएफ दावोस 2026 की वार्षिक बैठक में हिस्सा ले रहे हैं।
असम की दृष्टि मेधी क्विकघी की सह-संस्थापक हैं जो भारत में श्रमिक वर्ग के लिए आसान बाजार पहुंच का निर्माण करने और उन्हें कौशल विकास, प्रशिक्षण एवं सशक्तिकरण प्रदान करने पर केंद्रित है।
सिंह नयी दिल्ली के निवासी हैं और उनकी संस्था ‘कोऑपरेशन17’ नागरिक सहभागिता, अनुसंधान एवं प्रत्यक्ष कार्यान्वयन के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के इर्द-गिर्द सहयोग को बढ़ावा देती है।
सिंह ने कहा कि वे नागरिक अव्यवस्था को दूर करने के लिए नागरिकों, संस्थानों, व्यवसायों एवं सरकारों के साथ मिलकर काम करते हैं। वह दिल्ली और उसके आसपास के शहरी और ग्रामीण स्थानीय समुदायों के साथ क्षेत्रीय नगर सभाओं, हितधारकों के संवादों एवं सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से सहयोग स्थापित करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा सीधा सा लक्ष्य है। नागरिक व्यवस्था में गड़बड़ी..विश्वास की कमी, सूचना विषमता एवं कोविड के बाद लोगों के आपसी संपर्क की शक्ति का सही उपयोग न कर पाने के कारण होती है। जमीनी स्तर से शुरू की गई, समस्या-समाधान वाली नागरिक पहल ही वैश्विक सहयोग में आई गिरावट को रोकने और उसे पलटने का एकमात्र रास्ता है।’’
विश्व आर्थिक सम्मेलन 2026 में, उनका उद्देश्य भारत की कहानी को सतत विकास की परिभाषा के रूप में प्रस्तुत करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाना होगा।
दूसरी ओर, मेधी एक उद्यमी हैं जो कौशल विकास एवं व्यापार पर ध्यान केंद्रित करती हैं और पूर्वोत्तर भारत के स्वदेशी समुदायों को बाजार संपर्क तथा व्यापार पहुंच के मामले में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।
प्रौद्योगिकी विकास पर उनका ध्यान भारत को एक उभरते नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने और पूर्वोत्तर भारत के जमीनी स्तर के समुदायों की आवाज बनने के उनके उद्देश्य के अनुरूप है।
प्रौद्योगिकी के उपयोग से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सरल बनाने पर उनके ध्यान ने उन्हें अपना खुद का डिजिटल व्यापार मंच ‘क्विकघी’ पेश करने के लिए प्रेरित किया है। यह एक एआई अनुशंसा मॉडल है जो व्यापारियों को वस्तुओं के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करता है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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