नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (भाषा) भारतीय दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इस साल जुलाई-सितंबर तिमाही में 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कुल 72 सौदे हुए।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के डीलट्रैकर के अनुसार, इसमें 42.8 करोड़ डॉलर मूल्य के तीन आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और 8.8 करोड़ डॉलर मूल्य का एक पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) शामिल है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत ने बयान में कहा कि सार्वजनिक बाजार गतिविधियों को छोड़कर 68 लेनदेन में निजी सौदों का मूल्य तीन अरब डॉलर रहा। यह उछाल 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सात उच्च मूल्य सौदों के कारण हुआ।
इसमें कहा गया कि इस तिमाही का सबसे उल्लेखनीय सौदा टोरेंट फार्मा द्वारा जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स में 46 प्रतिशत हिस्सेदारी का 1.4 अरब डॉलर में अधिग्रहण रहा। इससे उच्च वृद्धि वाले चिकित्सीय खंडों और ‘क्रोनिक केयर’ बाजारों में इसकी स्थिति मजबूत हुई।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के साझेदार भानु प्रकाश कलमथ एस. जे. ने कहा, ‘‘ तीसरी तिमाही में सौदों ने जोर पकड़ा जो क्षमता और नवाचार-आधारित निवेश के स्वस्थ मिश्रण से प्रेरित रहे।’’
उन्होंने कहा कि रणनीतिक समेकन द्वारा समर्थित औषधि एवं जैव प्रौद्योगिकी में गति, भारत की जीवन विज्ञान क्षमता में बढ़ते विश्वास का संकेत है।
विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) परिदृश्य में 2025 की तीसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में गतिविधियां बढ़ीं। इसमें 2.5 अरब डॉलर मूल्य के 36 सौदे हुए जो पिछली तिमाही की तुलना में 57 प्रतिशत अधिक है।
निजी इक्विटी (पीई) के मोर्चे पर स्वास्थ्य सेवा एवं औषधि क्षेत्र ने 2025 की तीसरी तिमाही में 42.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के 32 सौदे देखे। यह पिछली तिमाही की तुलना में मात्रा के लिहाज से तीन प्रतिशत की गिरावट और मूल्य के हिसाब से 27 प्रतिशत की कमी है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत ने कहा कि गतिविधियां स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, कल्याण और औषधि सेवाओं पर केंद्रित रही जिसमें प्रारंभिक एवं मध्य-चरण के निवेश को स्पष्ट प्राथमिकता दी गई।
भाषा निहारिका अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
