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Wednesday, 25 March, 2026
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आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को एक अप्रैल से पूरी क्षमता से परिचालन का निर्देश

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नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) बिजली मंत्रालय ने आयातित कोयले पर आधारित ताप विद्युत संयंत्रों को एक अप्रैल से तीन महीने तक पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। समझा जाता है कि ऐसा इस गर्मी के मौसम में बिजली की अनुमानित 270 गीगावाट की अधिकतम मांग के दौरान किसी भी तरह की बिजली की कमी से बचने के लिए किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि देश में आयातित कोयले पर आधारित संयंत्रों को भेजे गए पत्रों में, बिजली मंत्रालय ने ‘बिजली अधिनियम’ की धारा 11 का हवाला देते हुए उन्हें पूरी क्षमता से काम करने को कहा है।

पत्र के अनुसार, यह कदम बिजली की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जिसमें मौजूदा मांग-आपूर्ति की स्थिति और आने वाले महीनों में बिजली की मांग में अपेक्षित वृद्धि को ध्यान में रखा गया है।

मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि इस गर्मी के मौसम (अप्रैल से आगे) के दौरान बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट से अधिक होगी।

हालांकि, पिछली गर्मियों (अप्रैल, 2025 से आगे) के दौरान, जून, 2025 में बिजली की अधिकतम मांग 242.77 गीगावाट थी।

हालांकि, सरकारी अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 की गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 277 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद थी।

मई, 2024 में बिजली की अधिकतम मांग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर, लगभग 250 गीगावाट तक पहुंच गई थी। इससे पहले, बिजली की अधिकतम मांग का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर 243.27 गीगावाट सितंबर, 2023 में दर्ज किया गया था।

फरवरी के महीने में बिजली की जिस अधिकतम मांग को पूरा किया गया (यानी सबसे अधिक आपूर्ति), वह फरवरी, 2025 में दर्ज किए गए 238.06 गीगावाट के स्तर से थोड़ा बढ़कर 243.15 गीगावाट हो गई।

सूत्रों ने बताया कि देश में आयातित कोयले पर आधारित लगभग 15 ताप विद्युत परियोजनायें हैं, जिन्हें बिजली मंत्रालय से यह निर्देश मिला है।

उन्होंने आगे बताया कि यह आदेश एक अप्रैल, 2026 से 30 जून, 2026 तक बिजली के उत्पादन और आपूर्ति के लिए मान्य रहेगा।

इस महीने की शुरुआत में, टाटा पावर की इकाई ‘कोस्टल गुजरात पावर लिमिटेड’ (सीजीपीएल)—जो 4,000 मेगावाट के मुदड़ा संयंत्र का परिचालन करती है,—ने जीयूवीएनएल (गुजरात) के साथ पूरक बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) पर हस्ताक्षर करने की जानकारी दी थी।

यह संयंत्र अपने कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा गुजरात को आपूर्ति करता है। कंपनी इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के साथ अतिरिक्त पीपीए पर हस्ताक्षर करेगी।

कंपनी ने दो जुलाई, 2025 को मुदड़ा संयंत्र की सभी इकाइयों में अपना काम रोक दिया था और संयंत्र के अस्थायी रूप से बंद होने के कारण उसे नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गुजरात के कच्छ में स्थित 4,000 मेगावाट का अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना (यूएमपीपी) एक कोयला-आधारित ताप विद्युत संयंत्र है, जिसमें 800 मेगावाट की पांच इकाइयां हैं जो गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को बिजली आपूर्ति करती हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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