चंडीगढ़, एक अक्टूबर (भाषा) बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत देते हुए, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को राज्य में फसल ऋण और ट्यूबवेल कनेक्शनों के बिजली बिलों का भुगतान स्थगित करने की घोषणा की।
सैनी ने यहां मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ पूरी तरह खड़ी है।’’
उन्होंने बताया कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से सरकार ने बुधवार को 2,386 लोगों के खातों में 4.72 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि हस्तांतरित की, जिनके घर क्षतिग्रस्त हो गए थे और पशुधन नष्ट हो गए थे।
उन्होंने कहा कि मुआवजे की राशि में घरों के नुकसान के लिए 4.67 करोड़ रुपये और मवेशियों के नुकसान के लिए 4.21 लाख रुपये शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 6,397 गांवों के 5.37 लाख किसानों ने फसल क्षतिपूर्ति के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है।
उन्होंने आगे बताया कि सत्यापन पूरा होने के बाद राज्य सरकार किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा देगी।
सैनी ने कहा, ‘‘दिवाली से पहले, प्रभावित किसानों को फसल क्षति का मुआवज़ा मिल जाएगा।’’ उनके साथ अन्य मंत्री कृष्ण लाल पंवार, अरविंद शर्मा और कृष्ण कुमार बेदी भी मौजूद थे।
सैनी ने कहा कि हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ ने हरियाणा के कई जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे फसलों, पशुधन और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है।
प्रभावित किसानों के लिए राहत की घोषणा करते हुए, सैनी ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में ट्यूबवेल कनेक्शनों के लिए बिजली बिल भुगतान दिसंबर 2025 तक स्थगित करने का फैसला किया है।
उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों को जुलाई 2025 तक अपने बिलों का भुगतान करना था, वे बिना किसी अधिभार के जनवरी 2026 तक भुगतान कर सकते हैं। इससे 7.10 लाख किसानों को राहत मिलेगी।
सैनी ने आगे कहा कि उनकी सरकार ने सहकारी समितियों से लिए गए खरीफ फसल ऋणों की अदायगी को स्थगित करने का भी निर्णय लिया है।
फसल ऋणों पर राहत की घोषणा करते हुए, सैनी ने कहा कि जिन गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक फसलें नष्ट हो गई हैं और जहां ऋणी किसानों को 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल का नुकसान हुआ है, वहां सहकारी समितियों से लिए गए खरीफ सत्र के फसल ऋणों की वसूली स्थगित कर दी गई है।
ऐसे किसानों को आगामी रबी सत्र के लिए नए फसल ऋण भी प्रदान किए जाएंगे। इस निर्णय से लगभग तीन लाख किसानों को लाभ होगा।
इस बीच, सैनी ने कहा कि 30 सितंबर तक राज्य को पांच लाख टन धान प्राप्त हुआ था, जिसमें से 3.58 लाख टन की खरीद पहले ही हो चुकी थी। अब तक 109 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित किए जा चुके हैं।
इसी प्रकार, राज्य एजेंसियों ने 187.30 टन ‘श्रीअन्न’ (मोटा अनाज) खरीदा है, जबकि व्यापारियों ने 4,970 टन अनाज खरीदा है।
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में किसान की फसल खराब हो जाती है और व्यापारी उसे कम कीमत पर खरीद लेते हैं, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसान को उस दिन के लिए निर्धारित ‘भावांतर’ दर के अनुसार मूल्य अंतर का मुआवजा दिया जाए।
सैनी ने बुधवार को राज्य के पंचायती राज संस्थानों को राज्य वित्त आयोग के अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 404 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की, जिससे ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
पाण्डेय
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