नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) केंद्र ने पांच निजी कंपनियों को प्रायोगिक आधार पर लगभग 50,000 हेक्टेयर में विशिष्ट बागवानी फसलों की ‘क्लस्टर’ यानी संकुल आधार पर खेती करने की अनुमति दी है। इसके लिए सरकारी सब्सिडी सहित 750 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय उपज को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और किसानों की आय को बढ़ाना है।
देसाई एग्रीफूड्स, एफआईएल इंडस्ट्रीज, सह्याद्री फार्म्स, मेघालय बेसिन मैनेजमेंट एजेंसी, और प्रसाद सीड्स पांच वे कंपनियां हैं जिन्हें एक बोली प्रक्रिया के माध्यम से प्रायोगिक संकुल खेती के लिए चुना गया है।
केंद्र हाल ही में शुरू की गई केंद्रीय योजना संकुल विकास कार्यक्रम (सीडीपी) के तहत परियोजना के आकार के आधार पर 100 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देगा, जिसे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा 2,200 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू किया गया है।
कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव, प्रिय रंजन ने पीटीआई-भाषा से कहा, संकुल आधारित दृष्टिकोण से दुनिया भर में अविश्वसनीय सफलता हासिल हुई है। भारत में, सरकार पहली बार वित्तीय सहायता देकर विशिष्ट बागवानी फसलों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के बाजार-आधारित विकास को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये पांच कंपनियां लगभग 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई हैं और लगभग 55,000 किसानों को अपने दायरे में लाती हैं। इस समूह में लगभग 750 करोड़ रुपये का निवेश है।’’
उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, देसाई एग्रीफूड्स की 103 करोड़ रुपये की ‘केला संकुल’ परियोजना आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में विकसित की जाएगी, सह्याद्री फार्म्स की 205 करोड़ रुपये की ‘अंगूर संकुल’ परियोजना महाराष्ट्र के नासिक में विकसित की जाएगी जबकि मेघालय बेसिन प्रबंधन एजेंसी की 52 करोड़ रुपये की ‘हल्दी संकुल’ परियोजना पश्चिम जयंतिया हिल्स में विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि एफआईएल इंडस्ट्रीज जम्मू और कश्मीर के शोपियां में एक ‘सेब संकुल’ परियोजना विकसित करेगी जबकि प्रसाद सीड्स तेलंगाना के महबूबनगर में एक ‘आम (मैंगो) संकुल’ परियोजना विकसित करेगी।
केला, सेब, अंगूर, हल्दी और आम वे मुख्य फसलें हैं जिन पर ये कंपनियां ध्यान केन्द्रित करेंगी। परियोजना के पूरा होने और परिचालन की समय-सीमा चार वर्ष होगी।
सरकार का लक्ष्य देश भर में चिन्हित 55 अलग-अलग संकुलों को विकसित करना है, प्रत्येक संकुल की अपनी विशिष्ट फसल होगी। प्रारंभ में, प्रायोगिक आधार पर 12 संकुलों में सात फसलों पर ध्यान दिया जायेगा।
संकुल विकास परियोजना के तहत, 5,000 हेक्टेयर से अधिक के मिनी संकुल के लिए 25 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता, 5,000-10,000 हेक्टेयर के बीच मध्य आकार के संकुल के लिए 50 करोड़ रुपये तक और 15,000 हेक्टेयर से अधिक के वृहत संकुल के लिए 100 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
संकुल खेती की कार्यान्वयन एजेंसियों को विभिन्न कार्यक्षेत्रों के लिए बोली प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाता है।
निजी कंपनियों के अलावा, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियां (एफपीसी), महासंघ, सहकारी समितियां, भागीदारी फर्म, स्वामित्व फर्म, राज्य कृषि एवं विपणन बोर्ड और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं कार्यान्वयन एजेंसियां बनने के लिए पात्र हैं।
भाषा राजेश राजेश रमण
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