नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) कारोबारियों की मुनाफावसूली के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ गईं और 200 रुपये की गिरावट के साथ 1,31,600 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी।
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत पिछले कारोबार में 1,000 रुपये बढ़कर 1,31,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
स्थानीय सर्राफा बाजार में, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 200 रुपये घटकर 1,31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गया। इससे पहले यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 1,31,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
हालांकि, उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में चांदी की कीमतों में 2,000 रुपये की तेजी आई और यह अपने रिकॉर्ड स्तर 1,84,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के करीब पहुंच गई। मंगलवार को इसने 1,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड छुआ था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 4,246.08 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिससे हालिया तेजी जारी रही क्योंकि अमेरिका में राजकोषीय चिंताओं और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश वाले विकल्पों की ओर रुख किया।
अमेरिकी सरकार के मौजूदा वित्तपोषण के संकट के कारण कई विभागों के कामकाज ठप होने (शटडाउन) के कारण प्रमुख आर्थिक आंकड़ों के जारी होने में देरी से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे सोने में तेजी जारी है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष, शोध विश्लेषक – जिंस और मुद्रा, जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘नए संकेतों के अभाव और अमेरिकी राजकोषीय स्थिति को लेकर लगातार चिंताओं ने सुरक्षित निवेश की मांग को मजबूत किया है, जिससे सोने की कीमतों में तेजी आई है।’’
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी जिंस शोध कायनात चैनवाला ने कहा कि निवेशकों की धारणा इस उम्मीद से प्रभावित हो रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल के अंत में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है।
हाजिर चांदी मामूली बढ़त के साथ 53.05 डॉलर प्रति औंस पर रही। मंगलवार को यह 53.62 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
जिंस बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार मुनाफावसूली के बावजूद, इस कीमती धातु का अंतर्निहित रुख तेजी का बना हुआ है, जिसे व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों के संयोजन से समर्थन मिल रहा है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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