नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट जारी रही। डॉलर के मज़बूत होने और वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बीच सोने की कीमत में 200 रुपये और चांदी की कीमत में 3,000 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 200 रुपये गिरकर 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई, जो बृहस्पतिवार को 1,56,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
चांदी की कीमत भी 3,000 रुपये की गिरावट के साथ 2,47,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस), सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘सोने पर दबाव बना रहा और यह दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा था। इसमें नकारात्मक रुझान देखने को मिला, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाज़ार का माहौल सतर्क बना हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे गतिरोध के कारण ऊर्जा की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं और सोने की कीमतों में तेजी की गुंजाइश सीमित हो गई है।
गांधी ने कहा, ‘‘मज़बूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में स्थिरता ने कीमतों पर नीचे की ओर दबाव और बढ़ा दिया है। डॉलर इंडेक्स लगातार तीन हफ़्तों की गिरावट के बाद इस हफ़्ते बढ़त दर्ज करने की राह पर है, जिससे सोने जैसी बिना किसी लाभ देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया है।’’
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में, हाजिर सोने की कीमत में मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 4,708.17 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत में लगभग एक प्रतिशत की तेजी आई और यह 75.96 डॉलर प्रति औंस हो गई।
एनकेपी सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के शोध विश्लेषण विभाग के उपाध्यक्ष, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि कीमतों में उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से ईरान, इज़राइल और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की मौजूदगी से जुड़े तनाव के कारण अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि विरोधाभासी संकेतों और किसी स्पष्ट समाधान के अभाव में, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने और खबरों के आधार पर इनमें बदलाव आने की संभावना है।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
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