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Monday, 9 February, 2026
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गिग अर्थव्यवस्था को कम नियमन की जरूरत: एटर्नल संस्थापक दीपिंदर गोयल

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नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) एटर्नल के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने शुक्रवार को भारत की गिग अर्थव्यवस्था के लिए कम नियमन की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि इससे अधिक लोगों को संगठित कार्यबल में लाने में मदद मिलेगी।

उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया, जब गिग श्रमिकों के संगठन बेहतर भुगतान और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

गोयल ने 10 मिनट में डिलीवरी का भी बचाव किया और कहा कि यह उपयोगकर्ता के घर के नजदीक स्टोर होने की वजह से संभव हो पाता है, न कि ‘डिलीवरी साझेदार से तेज वाहन चलाने को कहने’ की वजह से।

एटर्नल के पास खाद्य आपूर्ति कंपनी जोमैटो और क्विक-कॉमर्स फर्म ब्लिंकिट का स्वामित्व है।

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (जीआईपीएसडब्ल्यूयू) ने पिछले महीने श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर कई मुद्दे उठाए थे। इनकी प्रमुख मांग थी कि कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए 10–20 मिनट में सामान पहुंचाने की अनिवार्यता को तुरंत खत्म किया जाए।

नवंबर में सरकार ने सभी चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया, जिससे बड़े सुधार लागू हुए। इनमें गिग श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी शामिल है।

नए साल की पूर्व संध्या पर गिग श्रमिकों की यूनियनों की हड़ताल के एक दिन बाद एटर्नल के संस्थापक ने देश के गिग श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर बहस को लेकर एक्स पर कई पोस्ट किए। इस हड़ताल का खाद्य आपूर्ति और क्विक कॉमर्स कंपनियों के संचालन पर नगण्य असर पड़ा।

गोयल ने कहा, ”मैं दोहराता हूं – गिग वर्क भारत में संगठित रोजगार सृजन के सबसे बड़े इंजनों में एक है। हम बीमा, निष्पक्ष, समय पर वेतन देते हैं।”

उन्होंने कहा, ”गिग को और अधिक नियमन की जरूरत नहीं है, बल्कि कम नियमन की जरूरत है। इससे अधिक लोग इस दायरे में आएंगे। कुछ पैसा कमा पाएंगे। खुद को कौशलयुक्त बना पाएंगे और बाद में भारत के संगठित कार्यबल में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा, वे नियमित रूप से अपने बच्चों को स्कूल भेज सकेंगे”

एक अलग पोस्ट में गोयल ने बताया कि कंपनियां 10 मिनट की डिलीवरी का वादा कैसे पूरा करती हैं। उन्होंने कहा, ”हमारा 10 मिनट में डिलीवरी का वादा आपके घरों के एकदम नजदीक स्टोर होने की वजह से संभव हो पाता है। ऐसा डिलीवरी साझेदार से तेज वाहन चलाने को कहने से संभव नहीं होता। डिलीवरी साझेदारों के ऐप में ऐसा कोई टाइमर नहीं दिखाई देता है, जिससे पता चले कि ग्राहक से कितने समय में सामना पहुंचाने का वादा किया गया है।’’

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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