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Tuesday, 31 March, 2026
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डीपीडीपी नियम: बड़ी कंपनियों के लिए समयसीमा कम करने पर विचार जारी

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(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) नियम को लागू करने की 18 महीने की समयसीमा को बड़ी कंपनियों के लिए कम किया जा सकता है। सरकार इस मुद्दे पर उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत कर रही है।

सरकार ने बहुप्रतीक्षित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) नियम 2025 को हाल ही में जारी किया था। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां और कई बड़ी कंपनियां पहले से ही कई अन्य बाजारों में कड़े डेटा संरक्षण मानकों का पालन कर रही हैं जिनमें ‘जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन’ (यूरोपीय संघ का डेटा एवं कानून) भी शामिल है और इस तर्क ने भारत में नए नियमों के तेजी से कार्यान्वयन के बारे में चर्चा को जोर दिया है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पहले से ही उद्योग के संपर्क में है।

वैष्णव से बड़ी कंपनियां के पहले से ही अन्य जगहों पर कड़े मानदंडों का अनुपालन करने की पृष्ठभूमि में 18 महीने की समयसीमा के औचित्य के बारे में सवाल किया गया था।

मंत्री ने कहा, ‘‘ हम उद्योग जगत के साथ चर्चा कर रहे हैं…नियमों का पहला ‘सेट’ प्रकाशित हो चुका है और यह उचित समयसीमा प्रदान करता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उद्योग जगत की क्या मांग है तथा हमारा जोर किस पर है।’’

वैष्णव से बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्टार्टअप के समान अनुपालन समयसीमा दिए जाने पर सवाल किया गया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘ हम अनुपालन के लिए आवश्यक समय को और कम करने के लिए उद्योग के संपर्क में हैं क्योंकि… बिल्कुल वही तर्क हमने उद्योग को दिया है कि आपके पास पहले से ही अनुपालन ढांचा है जो अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में मौजूद है… आप इसे क्यों नहीं दोहरा सकते…’’

इन चर्चाओं में उद्योग जगत का रुख ‘‘काफी सकारात्मक’’ रहा है।

वैष्णव ने कहा, ‘‘ इसलिए जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, एक बार डेटा सुरक्षा बोर्ड स्थापित हो जाएगा और पूरा डिजिटल ढांचा जो पहले से तैयार है, लागू हो जाएगा… उसके बाद हम नियमों में और संशोधन करेंगे ताकि समयसीमा कम की जा सके।’’

डीपीडीपी नियम जो मुख्य कानून को क्रियान्वित करते हैं, एक निश्चित समयसीमा के माध्यम से प्रभावी होंगे। इससे व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण करने वाली कंपनियों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए 18 महीने का समय मिल जाता है।

डेटा संरक्षण बोर्ड के प्रावधान (जो डीपीडीपी अधिनियम व इसके नियमों के प्रवर्तन और कार्यान्वयन की देखरेख के लिए जिम्मेदार होंगे, जिसमें शिकायतों को संभालना, पूछताछ करना और डेटा सुरक्षा दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है) तुरंत लागू हो जाएंगे; जबकि सहमति प्रबंधक ढांचा 12 महीने के बाद सक्रिय होगा। उपयोगकर्ता सहमति नोटिस, सुरक्षा उपाय, डेटा अधिकार और उल्लंघन अधिसूचना जैसे अनुपालन दायित्व 18 महीने के बाद लागू होंगे।

इन नियमों का मकसद नागरिकों को अपने डेटा पर नियंत्रण प्रदान करना, दुरुपयोग की जांच करने की अनुमति देना और ऑनलाइन मंच में उनकी गोपनीयता की रक्षा करना है।

वैष्णव ने कहा, ‘‘ डेटा सुरक्षा नियम हमारे नागरिकों के डेटा एवं गोपनीयता को डिजिटल परिवेश द्वारा संरक्षित करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएंगे। नियम सरल भाषा में हैं और अत्यधिक कार्यान्वयन पर केंद्रित हैं। हमने उद्योग और नागरिक समूहों से मिले सभी सुझावों पर विचार किया है।’’

मंत्री ने कहा कि भारत डिजिटल दुनिया के लिए एक नए कानूनी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दे रहा है। समाज को भ्रामक सूचनाओं और ‘डीपफेक’ से उत्पन्न चुनौतियों से बचाने के लिए ऐसा नियामकीय एवं कानूनी ढांचा आवश्यक है।

उन्होंने डिजिटल दुनिया की बारीकियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेषज्ञों के योगदान और मजबूत प्रौद्योगिकी-कानूनी उपायों को शामिल करते हुए एक व्यापक दायरे की आवश्यकता पर बल दिया।

वैष्णव ने कहा, ‘‘ जिस तरह से डिजिटल प्रौद्योगिकी और नए अवसर सामने आ रहे हैं….उससे नागरिकों तथा आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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