scorecardresearch
Monday, 27 April, 2026
होमदेशअर्थजगतडिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में जुलाई से फिर आई तेजीः आरबीआई डिप्टी गवर्नर

डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में जुलाई से फिर आई तेजीः आरबीआई डिप्टी गवर्नर

Text Size:

मुंबई, सात नवंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने शुक्रवार को कहा कि जुलाई, 2025 से डिजिटल धोखाधड़ी के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं।

शंकर ने यहां भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक कार्यक्रम में कहा, “लेनदेन की संख्या के अनुपात में देखें तो इस वर्ष की शुरुआत से जुलाई तक धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई थी। लेकिन जुलाई के बाद से ये मामले फिर बढ़ने लगे हैं।”

उन्होंने कहा कि वृद्धि मौसमी या चक्रीय हो सकती है और आरबीआई इसके कारणों की जांच कर रहा है।

आरबीआई के वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटकर 23,953 पर आ गई जबकि इससे पहले के वित्त वर्ष में यह 36,000 से अधिक थी। धोखाधड़ी की अधिकांश घटनाएं डिजिटल भुगतान के क्षेत्र, जैसे कार्ड और इंटरनेट लेनदेन के दौरान हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंक संख्या के लिहाज से करीब 60 प्रतिशत धोखाधड़ी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा मूल्य के आधार पर 71 प्रतिशत से अधिक है।

शंकर ने बताया कि आरबीआई ने ‘म्यूल हंटर’ नाम की डिजिटल प्रणाली भी तैनात की है, जो धोखाधड़ी से मिली रकम को आगे भेजने वाले खातों का पता लगाने में मदद करती है।

उन्होंने कहा कि एकीकृत भुगतान प्रणाली ‘यूपीआई’ के विकास के शुरुआती दौर में बैंकों ने इसकी क्षमता को पर्याप्त रूप से नहीं समझा, जबकि वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां अपनी लचीली संरचना के कारण इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ीं।

केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर ने बैंकरों को संबोधित करते हुए कहा कि पारंपरिक बैंक संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं क्योंकि उनके पास बड़ा शाखा नेटवर्क, उच्च अनुपालन लागत और जटिल आईटी ढांचा है।

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि ये बैंक केवल “क्रमिक डिजिटलीकरण” करने से प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाएंगे।

उन्होंने बैंकों से प्रमुख अवसंरचना को आधुनिक बनाने और उसे लचीला करने की सलाह दी ताकि वे फिनटेक परिवेश के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।

आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा कि भविष्य में बैंकों की प्रतिस्पर्धात्मकता अब केवल बैलेंस शीट की ताकत पर नहीं बल्कि डेटा क्षमताओं और तकनीकी लचीलापन पर निर्भर करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि निजी डिजिटल मुद्राओं से बैंकों के अस्तित्व के लिए खतरा नजर आता है लेकिन इस पर अभी पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।

शंकर ने कहा कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के आने से भी बैंकिंग कारोबार में बड़े बदलाव होंगे और बैंकों को इन प्रभावों को समझने की जरूरत है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments