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Saturday, 25 April, 2026
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बढ़ता पलायन, कर्मचारी लागत अधिभार के बावजूद आईटी कंपनियों की भर्तियों में तेजी जारी

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नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) भारत की शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों ने प्रमुख बाजारों से लगातार सौदे मिलने से जून तिमाही में कुल 50,000 से अधिक लोगों को नौकरी दी है। हालांकि कर्मचारियों के जल्द नौकरियां बदलने, मार्जिन का दबाव, मानव संसाधन लागत अधिभार और कर्मचारी-संबंधी चुनौतियों ने आईटी उद्योग के लिए समस्या खड़ी कर दी है।

क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी की प्रतिभाओं के लिए खींचतान तब तक जारी रहेगी जब तक कि उद्योग के लिए तैयार मानव संसाधनों का बल उल्लेखनीय रूप से नहीं बढ़ जाता।

बाजार विशेषज्ञों की मानें तो आईटी कंपनियां मांग के अनुरूप रिक्त पदों को भरने की कोशिश में जुटी हैं वहीं गैर-प्रौद्योगिकी कंपनियां भी तकनीकी लोगों की तलाश में है ताकि डिजिटल दुनिया में रचे-बसे उनके उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी की जा सकें।

देश की शीर्ष तीन आईटी कंपनियों- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और विप्रो ने ही जून तिमाही में करीब 50,000 लोगों को नौकरी पर रखा।

टीमलीज डिजिटल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील सी बताते हैं कि अगले पांच वर्ष में प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुल 60 लाख नए रोजगार तैयार होंगे।

इस अनुकूल रोजगार परिदृश्य से जहां प्रौद्योगिकी पेशेवर काफी उत्साहित हैं वहीं नियोक्ताओं को अभूतपूर्व स्तर का पलायन, मानव संसाधन की बढ़ती लागत और एक समय में एक से अधिक नौकरी करने की प्रवृत्ति परेशान कर रही है।

सुनील कहते हैं कि आने वाले समय में आईटी कंपनियों पर मार्जिन का दबाव रहेगा क्योंकि सौदों का आकार नहीं बढ़ा है।

इंफोसिस ने जून तिमाही में 21,171 भर्तियां की हैं क्योंकि उसके यहां कर्मचारियों का पलायन बढ़कर 28.4 फीसदी हो गया है जो मार्च 2022 में 27.7 फीसदी था। एक साल पहले यह आंकड़ा 13.9 फीसदी था।

विप्रो ने जून तिमाही में 15,446 पेशेवरों की भर्ती की। उसके यहां पलायन दर 23.3 फीसदी है। मार्च तिमाही में यह 23.8 फीसदी और पिछले वर्ष 15.5 फीसदी था।

टीसीएस ने जून तिमाही में 14,136 पेशेवरों को नौकरी पर रखा। कंपनी में पलायन दर बढ़कर 19.7 फीसदी हो गई जो मार्च तिमाही में 17.4 फीसदी और पिछले वर्ष 8.6 फीसदी थी।

डेलॉयट इंडिया के निदेशक वाम्सी कारावडी ने कहा, ‘‘भर्तियां महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच चुकी हैं और कुछ मायनों में तो यह उससे भी पार चली गई है।’’

भाषा

मानसी प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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