मुंबई, 19 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक लाख करोड़ रुपये की तीन दिन की ‘परिवर्ती दर रेपो’ (वीआरआर) नीलामी को शुक्रवार को बैंकों की सुस्त प्रतिक्रिया मिली जो अल्पकालिक धन की सीमित आवश्यकता का संकेत देती है।
केंद्रीय बैंक को वीआरआर नीलामी में बैंकों से एक लाख करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 16,750 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
आरबीआई ने नीलामी में पूरी राशि को 5.26 प्रतिशत की ‘कट-ऑफ’ और भारित औसत दर पर स्वीकार कर लिया।
बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति अधिशेष में बनी रही, हालांकि इसका स्तर अपेक्षाकृत कम रहा।
आरबीआई के पास उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक प्रणाली में नकदी अधिशेष करीब 19,163.11 करोड़ रुपये रहा।
पिछले दिन की तुलना में नकदी की स्थिति में मामूली सुधार हुआ, लेकिन यह अब भी कम स्तर पर बनी रही, जो बैंकिंग प्रणाली में अपेक्षाकृत सख्त परिस्थितियों को दर्शाती है।
वीआरआर नीलामी में कम भागीदारी यह संकेत देती है कि आरबीआई द्वारा परिवर्तनीय दर रेपो परिचालन के माध्यम से नकदी समर्थन दिए जाने के बावजूद बैंकों में अल्पकालिक धन की मांग सीमित रही।
आरबीआई अल्पकालिक नकदी प्रबंधन और ओवरनाइट दरों को नीतिगत दर गलियारे के अनुरूप बनाए रखने के लिए वीआरआर नीलामियां आयोजित करता है। यह वीआरआर की व्यवस्था के तहत बैंकों को अलग-अलग ब्याज दरों पर बोली के जरिये पैसा उधार देता है।
नकदी दबाव को कम करने और ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न अवधियों की वीआरआर नीलामी के जरिए करीब 1.89 लाख करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी डाली है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 18 जून को दो नीलामियों के जरिये 72,300 करोड़ रुपये, 16 जून को सात दिन की वीआरआर नीलामी के जरिए 89,440 करोड़ रुपये और 15 जून को ओवरनाइट नीलामी के जरिये डाले गए 28,220 करोड़ रुपये शामिल हैं।
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