नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) कोयला खदानों, विशेषकर कम राख वाली कोकिंग कोल की खदानों के विस्तृत अध्ययन एवं विश्लेषण के बाद विदेशों में खदानों का अधिग्रहण कर सकती है। कोयला, खदान और इस्पात पर स्थायी समिति ने संसद में रखी रिपोर्ट में यह कहा।
समिति ने कहा कि इससे न केवल जीवाश्व ईंधन का आयात कम होगा बल्कि विदेशों में खनन के नए रास्ते भी खुलेंगे। इसमें बताया गया कि फिलहाल सीआईएल विदेशों में किसी भी कोयला खदान का अधिग्रहण नहीं कर रही है।
स्थायी समिति ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘देश में मौजूदा कोयला संसाधनों को ध्यान में रखते हुए, समिति चाहती है कि कोयला मंत्रालय/सीआईएल विदेशों में कोयला खदानों के अधिग्रहण की संभावना तलाशे।’’
कोल इंडिया ने अपनी एक अंतरराष्ट्रीय अनुषंगी के माध्यम से 2009 में मोजाम्बिक में कोयला खदानों के लिए आरंभिक अन्वेषण का लाइसेंस प्राप्त किया था। हालांकि इसमें पाया गया कि आवंटित खदानों में जो कोयला है उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है और कोयले को खदानों से निकालना व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।
रिपोर्ट में बताया कि इस जानकारी के बाद लाइसेंस मोजाम्बिक सरकार का लौटा दिया गया।
भाषा मानसी पाण्डेय
पाण्डेय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
