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Wednesday, 15 April, 2026
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सीआईसी ने कर शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लाने का सुझाव दिया

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नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कर चोरी शिकायतों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देने वाली औपचारिक व्यवस्था नहीं होने से पैदा होने वाले संदेह का जिक्र करते हुए कहा है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों को एक निगरानी प्रणाली तैयार करनी चाहिए।

सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने हाल ही में जारी आदेश में कहा है कि वर्तमान में शिकायतकर्ताओं के पास अपनी कर चोरी शिकायतों (टीईपी) की प्रगति जानने का कोई व्यवस्थित तरीका नहीं है, जिसके कारण उन्हें बार-बार सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आवेदन करना पड़ता है।

आयुक्त ने कहा कि समुचित व्यवस्था न होना यह ‘अनावश्यक संदेह एवं आशंका’ पैदा करता है कि शिकायतों का निपटारा उचित विचार के बगैर ही कर दिया गया है। इससे अनावश्यक रूप से आरटीआई आवेदन और आयोग के समक्ष दूसरी अपीलों की संख्या बढ़ती है।

यह सलाह उस समय दी गई जब आयोग ने 10 अपीलों के एक समूह का निपटारा किया, जिनमें शिकायतकर्ता ने अपनी कर चोरी संबंधी शिकायतों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।

सीआईसी ने जांच लंबित रहने के दौरान विस्तृत जानकारी देने से इनकार को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसी जानकारी आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत छूट के दायरे में आती है।

हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता को अपनी शिकायतों के परिणाम की सामान्य जानकारी पाने का अधिकार है।

आयोग ने जीएसटी अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता को उसकी शिकायतों की स्थिति और की गई कार्रवाई से अवगत कराया जाए।

इसके साथ ही, आयोग ने सुझाव दिया कि एक उपयुक्त प्रशासनिक ढांचा, विशेष रूप से ऑनलाइन ‘स्टेटस-ट्रैकिंग’ सुविधा विकसित की जाए, ताकि शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों की प्रगति देख सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जनता का विश्वास मजबूत होगा और बार-बार आरटीआई आवेदन करने की जरूरत कम होगी।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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