नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) केंद्र ने सूक्ष्म स्तर पर पानी के भंडारण और संरक्षण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी) योजना के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस योजना के दिशानिर्देशों में संशोधन करते हुए ‘अन्य आविष्कार’ अनुभाग का विस्तार किया है।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर डिग्गी निर्माण और जल संचयन प्रणालियों जैसी सूक्ष्म स्तर की जल प्रबंधन गतिविधियों की योजना बना सकते हैं।
इन प्रणालियों को व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ सामुदायिक उपयोग के लिए भी विकसित किया जा सकता है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई के लिए स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इससे पहले, ऐसी गतिविधियों के लिए धनराशि प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए कुल आवंटन के 20 प्रतिशत और पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 40 प्रतिशत तक सीमित थी।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘अब राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार इन सीमाओं को पार करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान किया गया है।’’
इन पहलों का उद्देश्य किसानों को सूक्ष्म सिंचाई अपनाने, जल-उपयोग दक्षता में सुधार लाने और अंततः उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करने में मदद करना है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के एक प्रमुख घटक के रूप में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना वर्ष 2015 में शुरू की गई थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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