नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित कोचिंग संस्थान वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टिट्यूट पर भ्रामक विज्ञापनों के लिए 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
संस्थान ने इन विज्ञापनों में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2023 के सफल उम्मीदवारों के उसके संस्थान से पढ़े होने का दावा किया था।
संस्थान ने अपने विज्ञापनों में दावा किया था कि उसने परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को पूरी तैयारी (प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में प्रशिक्षित किया है, जबकि वास्तविकता यह थी कि अधिकतर उम्मीदवार केवल साक्षात्कार अभ्यास या साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम के लिए ही संस्थान से जुड़े थे।
संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर 16 अप्रैल 2024 को परिणाम घोषित होने के बाद दावा किया कि कुल 1,016 में से चुने गए 645 से अधिक उम्मीदवार उसके संस्थान के थे जिनमें सर्वोच्च 10 रैंक में छह उम्मीदवार एवं सर्वोच्च 50 रैंक में 35 उम्मीदवार शामिल हैं।
ये दावे संस्थान के नियमित पाठ्यक्रम के विज्ञापनों के साथ दिखाए गए। इससे यह गलत धारणा बन गई कि सफल उम्मीदवारों ने पूरी परीक्षा तैयारी संस्थान से ही की।
सीसीपीए ने जांच में पाया कि कई उम्मीदवार पहले से ही प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर चुके थे और केवल साक्षात्कार अभ्यास या साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम के लिए ही संस्थान से जुड़े थे। इसके अलावा 431 दाखिला फॉर्म में कोर्स या दाखिले की तारीख का उल्लेख नहीं था। संस्थान ने फीस रसीद या अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए।
सीसीपीए ने कहा कि ऐसी जानकारी का खुलासा न करना छात्रों और अभिभावकों के लिए भ्रामक है। इससे यह गलत धारणा बनती है कि उम्मीदवारों की पूरी तैयारी संस्थान ने ही करवाई।
यह मामला और गंभीर इसलिए है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब संस्थान पर कार्रवाई हुई है।
यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2022 परिणामों से संबंधित विज्ञापनों में भी इसी तरह के उल्लंघन के लिए संस्थान पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
भाषा योगेश निहारिका
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