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Thursday, 22 October, 2026
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आर्या.एजी ने हिमाचल प्रदेश के सेब कारोबार में कदम रखा, भंडारण और वित्त की सुविधा देगी

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नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) अनाज कारोबार मंच आर्या.एजी ने हिमाचल प्रदेश की सेब मूल्य श्रृंखला में प्रवेश किया है। कंपनी चालू सत्र से सेब उत्पादकों और खरीदारों को भंडारण, वित्त और बाजार तक पहुंच की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

कंपनी का ध्यान किन्नौर, नारकंडा, रोहड़ू, कोटखाई और जुब्बल पर रहेगा। वह किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय संग्रहकर्ताओं के साथ मिलकर गुणवत्ता के आधार पर छांटे गए सेब को हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के संगठित बाजारों तक पहुंचाएगी।

कंपनी ने बयान में कहा कि बागानों के नजदीक स्थित पैक हाउस में कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित स्कैनर से सेब की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। ये स्कैनर फलों को रंग, आकार और सतह पर मौजूद खामियों के आधार पर छांटेंगे। साथ ही, प्रत्येक खेप का डिजिटल गुणवत्ता रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जो उसके साथ बना रहेगा।

छांटे गए सेब का बीमाकृत नियंत्रित वातावरण (सीए) वाले भंडारगृहों में भंडारण किया जाएगा। इनकी निगरानी डिजिटल वेयरहाउस रसीदों के जरिये होगी। इसके बाद सेब को साल भर खुदरा विक्रेताओं, ई-कॉमर्स मंचों, प्रसंस्करण कंपनियों और संस्थागत खरीदारों को बेचा जाएगा।

पहले सत्र में कंपनी का ध्यान घरेलू मांग पर रहेगा। इसके अलावा, आर्या.एजी जिंस के बदले वित्त उपलब्ध कराने की सुविधा भी देगी। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। वहीं, पंजीकृत व्यापारी और प्रसंस्करण कंपनियां नियंत्रित वातावरण वाले भंडारगृहों में रखे गुणवत्ता के आधार पर छांटे गए सेब के बदले कर्ज ले सकेंगी। इससे उन्हें फसल की कटाई के समय अपनी पूरी कार्यशील पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होगी।

कंपनी के मुताबिक, गुणवत्ता के वस्तुनिष्ठ आकलन, बीमा और भंडारण की सुविधा वाले फलों के बदले कर्ज देने की व्यवस्था अब तक बहुत कम देखने को मिली है।

कंपनी ने कहा कि प्रत्येक कर्ज को सेब की एक विशिष्ट खेप, उसके डिजिटल गुणवत्ता रिकॉर्ड, वेयरहाउस रसीद और संबंधित नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण कक्ष से जोड़ा जाएगा। एक बार भंडारण कक्ष खोलने के बाद उसे दोबारा सील नहीं किया जा सकता। इसलिए सेब निकालने की योजना खरीदारों की मांग के अनुरूप बनाई जाएगी और एक बार में पूरे भंडारण कक्ष के आकार के हिसाब से खेप जारी की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश में सेब की कटाई जुलाई से नवंबर तक होती है। इस दौरान किसानों को मंडियों में जल्द उपज बेचनी पड़ती है और अक्सर भुगतान के लिए कई सप्ताह इंतजार करना पड़ता है। दिसंबर से जून के बीच खरीदार नियंत्रित वातावरण वाले भंडारगृहों में रखे सेब या आयातित फलों पर निर्भर रहते हैं। इस अवधि में गुणवत्ता के आधार पर छांटे गए हिमाचली सेब की उपलब्धता कम रहती है।

आर्या.एजी के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी आनंद चंद्रा ने कहा, ”गुणवत्ता का आकलन शुरुआती चरण में करना, भंडारण की परिस्थितियों का सटीक प्रबंधन करना और फल की विशेषताओं के अनुरूप उसकी हर आवाजाही की योजना बनाना जरूरी है।”

कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रसन्ना राव ने कहा, ”अनाज की एक बोरी के बारे में फैसला लेने के लिए एक सप्ताह इंतजार किया जा सकता है, लेकिन ‘रॉयल डिलीशियस सेब के एक डिब्बे के मामले में ऐसा नहीं किया जा सकता। हम फलों पर अनाज कारोबार का वही तरीका लागू नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसी मंच पर एक अलग कार्यप्रणाली विकसित कर रहे हैं।”

भाषा राजेश राजेश योगेश

योगेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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