नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में मौजूद व्यवस्थागत चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम मेधा (एआई) रोगों के निदान, संक्रामक रोगों के बारे में आगाह करने और क्लिनिकल परीक्षण के मामले में मददगार साबित हो सकती है। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह कहा गया है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता और इसे वैश्विक स्तर पर अपनाने में सार्वजनिक-निजी सहयोग की अहमियत बताने के लिए भारत सहित कई देशों से जुड़े अध्ययनों का हवाला दिया गया है।
भारत से संबंधित अध्ययन में पाया गया है कि अपोलो अस्पताल हृदय से जुड़े जोखिमों के लिए बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग कर स्थापित मानदंडों की तुलना में अधिक सटीक आकलन कर रहा है।
हर साल लगभग 1.8 करोड़ लोग हृदय रोग से मरते हैं, जो दुनिया भर में होने वाली मौतों का करीब 32 प्रतिशत है। भारत में हृदयरोग से होने वाली मौतों की संख्या काफी अधिक है जहां कम उम्र में यह रोग शुरू होने और तेजी से बढ़ने के साथ उच्च मृत्यु दर भी अधिक है।
डब्ल्यूईएफ के अध्ययन के मुताबिक, ‘अपोलो अस्पताल पूरे भारत में 30 करोड़ से अधिक रोगियों की सेवा करने वाले 50 से अधिक अस्पतालों का संचालन करता है। अपोलो ने एक जोखिम स्तरीकरण गणना-पद्धति (एल्गोरिदम) बनाने की सोची जो भारत में किसी भी व्यक्ति में हृदय रोग के जोखिम संबंधी ‘स्कोर’ दे सकेगा।’
इस अध्ययन रिपोर्ट ने स्वास्थ्य देखभाल एआई के इस्तेमाल के लिए एक वैश्विक वर्गीकरण का प्रस्ताव रखते हुए कहा है कि वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली रोगियों की देखभाल में बदलाव लाने, लागत कम करने और लोगों को स्वस्थ, लंबा जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए इन नई प्रौद्योगिकियों की पूरी क्षमता का लाभ उठाने में मददगार हो सकता है।
डब्ल्यूईएफ की कार्यकारी समिति के सदस्य और स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के प्रमुख श्याम बिशेन ने कहा, ‘हम वैश्विक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, क्योंकि बढ़ती विपरीत परिस्थितियां सामूहिक कल्याण के साथ-साथ नियोक्ताओं, अर्थव्यवस्थाओं, बजट और सामाजिक लचीलेपन को भी खतरे में डाल रही हैं।’
इस अध्ययन में सहयोगी भूमिका में रही सलाहकार फर्म जेडएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रताप खेडकर ने कहा, ‘व्यापक स्तर पर और जिम्मेदारी से अपनाने पर एआई स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मौलिक रूप से बदलने और सबके लिए स्वास्थ्य परिणामों में सुधार की क्षमता रखती है।’
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