नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) हाल ही में जलवतरण करने वाले देश के प्रमुख विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को बनाने में लगभग 500 सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), 12,000 औद्योगिक कर्मियों और 2,000 बंदरगाह कर्मचारियों ने मदद की। मंगलवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह जानकारी दी गई।
समीक्षा के अनुसार, भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी अपनाने के बाद से एमएसएमई और अन्य उद्योगों में रोजगार सृजन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
समीक्षा में कहा गया है कि उदाहरण के लिए हाल ही में जलावतरण करने वाले आईएनएस विक्रांत के निर्माण में ही लगभग 500 एमएसएमई, 12,000 औद्योगिक कर्मचारी और 2,000 बंदरगाह कर्मचारियों को लगाना पड़ा।
आईएनएस विक्रांत देश के समुद्री इतिहास में बना सबसे बड़ा जहाज है। यह जहाज अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है।
भाषा अनुराग अजय
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